राजनीति में अक्सर भाषण, नारे और रैलियां सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन कभी-कभी किसी राजनीतिक कार्यक्रम से जुड़ी ऐसी कहानी सामने आती है, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। इंदौर में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान धार जिले से आए करीब 70 वर्षीय भागीरथ किशन परमार की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही। राहुल गांधी को देखने की इच्छा लेकर भागीरथ कार्यक्रम स्थल पर करीब 24 घंटे पहले ही पहुंच गए और उन्होंने वहीं रात गुजारी।

राहुल गांधी को देखने के लिए 24 घंटे पहले पहुंचे
धार निवासी भागीरथ परमार के लिए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम सिर्फ एक राजनीतिक आयोजन नहीं था। वह राहुल गांधी को सामने से देखने और उनका संबोधन सुनने की इच्छा लेकर एक दिन पहले ही कार्यक्रम स्थल पहुंच गए थे।
उम्र के इस पड़ाव पर भी लंबे इंतजार के बावजूद उनके उत्साह में कमी नहीं आई। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर ही रात बिताई और अगले दिन राहुल गांधी के संबोधन का इंतजार किया।
‘राहुल गांधी में इंदिरा गांधी की झलक दिखती है’
भागीरथ परमार ने बताया कि वह लंबे समय से कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की अपनी पुरानी याद भी साझा की।
भागीरथ के मुताबिक, राहुल गांधी को देखने पर उन्हें इंदिरा गांधी की झलक दिखाई देती है। उनके लिए राहुल गांधी केवल वर्तमान के एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि उस राजनीतिक परिवार की अगली पीढ़ी हैं, जिसके साथ उनकी पुरानी यादें जुड़ी हुई हैं।
राजीव गांधी और कंप्यूटर क्रांति को भी किया याद
भागीरथ परमार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल की भी चर्चा की। उन्होंने देश में कंप्यूटर के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के दौर को याद करते हुए कहा कि आज जिस डिजिटल दौर की बात की जाती है, उसकी शुरुआती यादें उन्हें राजीव गांधी के समय से जुड़ी लगती हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को लेकर उनकी भावनाओं के पीछे कांग्रेस से जुड़ी उनकी पुरानी राजनीतिक और व्यक्तिगत स्मृतियां भी हैं।
‘एक बार राहुल को देख लूं, फिर कोई मलाल नहीं’
राहुल गांधी को देखने की अपनी इच्छा जाहिर करते हुए भागीरथ परमार ने भावुक अंदाज में कहा, “मैं बस एक बार राहुल गांधी को करीब से देखना चाहता था। अगर उन्हें एक बार देख लूं, उसके बाद जीवन में मौत भी आ जाए तो मुझे कोई मलाल नहीं रहेगा।”
उनका यह बयान कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
राहुल की प्रत्यक्ष झलक नहीं मिली, आवाज सुनकर हुए संतुष्ट
कार्यक्रम में भीड़ और मंच से दूरी के कारण भागीरथ परमार को राहुल गांधी की प्रत्यक्ष झलक नहीं मिल सकी। हालांकि, उन्होंने लाउडस्पीकर के जरिए राहुल गांधी का संबोधन सुना।
भागीरथ ने बताया कि राहुल गांधी की आवाज सुनकर उन्हें संतोष हुआ। करीब 24 घंटे का इंतजार भले ही उन्हें राहुल गांधी से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं करा सका, लेकिन उनकी पुरानी राजनीतिक स्मृतियों और राहुल गांधी को देखने की इच्छा ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में एक अलग कहानी जरूर जोड़ दी।