भोपाल। इंदौर में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता डॉ. हितेष बाजपेयी ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को निशाने पर लेते हुए राहुल गांधी के कार्यक्रम और कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। बाजपेयी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि केवल उपहास करने से राहुल गांधी जननेता नहीं बन सकते।

‘स्टेज विक्टिम शो’ बताया कार्यक्रम
हितेष बाजपेयी ने आरोप लगाया कि युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम ‘स्टेज विक्टिम शो’ बनकर रह गया। उनके मुताबिक, कार्यक्रम में समस्याओं का जिक्र तो हुआ, लेकिन राहुल गांधी की ओर से उनके समाधान या कोई स्पष्ट रोडमैप पेश नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि एक जननेता से अपेक्षा होती है कि वह समस्याओं के साथ उनके समाधान की दिशा भी बताए।
कर्नाटक से मेडिकल फीस पर दी चुनौती
बीजेपी प्रवक्ता ने दिग्विजय सिंह को संबोधित करते हुए मेडिकल शिक्षा की फीस को लेकर भी सवाल उठाया। बाजपेयी ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने ₹500 सालाना फीस में मेरिट के आधार पर MBBS किया है।
उन्होंने कांग्रेस शासित कर्नाटक का उदाहरण देते हुए चुनौती दी कि वहां मेडिकल फीस कम करके गरीब विद्यार्थियों के लिए इसे फिर पुराने स्तर पर लाया जाए। बाजपेयी ने इसे नेतृत्व और नीतिगत प्रतिबद्धता दिखाने का तरीका बताया।
मोहन यादव के फैसले का दिया उदाहरण
हितेष बाजपेयी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया फैसलों का उदाहरण देते हुए कहा कि नेता की पहचान केवल आलोचना करने से नहीं, बल्कि समाधान देने से होती है।
उन्होंने दावा किया कि प्रशासनिक स्तर पर आपत्तियों के बावजूद मुख्यमंत्री ने मेडिकल छात्रों के हित में निर्णय लिया। बाजपेयी ने इसे जनप्रतिनिधि के तौर पर समाधान आधारित राजनीति का उदाहरण बताया।
कांग्रेस के पुराने शासन पर उठाए सवाल
बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस के पूर्व शासनकाल को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस के शासनकाल में देश और मध्य प्रदेश में नए AIIMS, IIT और IIM जैसे संस्थानों के विस्तार की स्थिति क्या थी।
उन्होंने दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए सवाल किया कि उस दौरान इंदौर में IIT या IIM क्यों नहीं आया। इसके अलावा उन्होंने नर्मदा के पानी को घर-घर पहुंचाने को लेकर भी कांग्रेस के पुराने शासन पर सवाल खड़े किए।
‘घाव कुरेदने से नहीं, मलहम से समाधान’
हितेष बाजपेयी ने अपनी पोस्ट के अंत में कांग्रेस और राहुल गांधी की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि घाव कुरेदने से खून निकलता है, जबकि जनता को मलहम और मदद की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा कि उनके अनुसार सच्चे नेता की पहचान ऐसे फैसलों से होती है, जो लोगों के जीवन में बदलाव लाएं। इसी संदर्भ में उन्होंने छात्राओं को कॉलेज जाने के लिए ई-स्कूटी देने जैसी योजनाओं का उदाहरण दिया।
बाजपेयी ने दिग्विजय सिंह और राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि “उपहास से आगे बढ़कर उदाहरण बनिए, मैच नहीं मन जीतिए।”
‘छात्रों की गूंज’ को लेकर जारी है सियासी बयानबाजी
राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम के बाद बीजेपी और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं से जुड़े शिक्षा, रोजगार, भर्ती प्रक्रिया और अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई थी। बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी के बयानों और कार्यक्रम के स्वरूप पर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस ने कार्यक्रम को युवाओं की समस्याओं को सामने रखने का मंच बताया है।