छतरपुर। जनपद पंचायत छतरपुर में तत्कालीन ब्लॉक कोऑर्डिनेटर के पद पर पदस्थ रहीं नीलम तिवारी को रिश्वत के एक पुराने मामले में विशेष अदालत ने दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें 3 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2020 का है, जिसमें लोकायुक्त पुलिस ने नीलम तिवारी को रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया था।

13 शौचालयों के भुगतान से जुड़ा था मामला
मामला 13 शौचालयों के निर्माण के भुगतान अथवा उससे जुड़ी प्रक्रिया से संबंधित था। शिकायतकर्ता जितेंद्र सिंह के अनुसार, इस काम के लिए प्रति शौचालय 500 रुपये के हिसाब से रिश्वत की मांग की गई थी।
शिकायत के मुताबिक, नीलम तिवारी पहले ही 1,000 रुपये बतौर रिश्वत ले चुकी थीं। इसके बाद शेष राशि के रूप में 5,500 रुपये दिए जाने थे।
5,500 रुपये लेते लोकायुक्त ने पकड़ा
शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई की और 18 फरवरी 2020 को 5,500 रुपये की रिश्वत लेते हुए नीलम तिवारी को ट्रैप किया। इसके बाद मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
मामला कई वर्षों तक अदालत में चला। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने नीलम तिवारी को दोषी माना।
कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद छतरपुर की विशेष अदालत ने नीलम तिवारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए 3 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
छह साल पुराने इस रिश्वत प्रकरण में अदालत के फैसले के बाद भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में चल रही न्यायिक प्रक्रिया एक बार फिर सामने आई है। फैसले में दोषसिद्धि के आधार पर अब नीलम तिवारी को निर्धारित सजा भुगतनी होगी।