November 6, 2026

भोपाल/सिंगरौली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 सितंबर को सिंगरौली जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने किसानों को अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं दीं और कहा कि सरकार तकनीक और नवाचार के माध्यम से किसानों की फसल उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के हित में सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सिंगरौली की कृषि संभावनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिले में प्राकृतिक खेती का विस्तार हो रहा है और 3 हजार से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं।

सिंगरौली को प्राकृतिक खेती का बड़ा केंद्र बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंगरौली की रत्नगर्भा भूमि में प्राकृतिक खेती तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जाधानी के रूप में पहचान रखने वाले सिंगरौली को अब प्राकृतिक खेती के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने किसानों से अपील की कि सरकार और किसान मिलकर सिंगरौली को कृषि के क्षेत्र में अग्रणी जिला बनाने की दिशा में काम करें।

100 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई क्षमता को बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही उद्यानिकी का रकबा बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करने, खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने की योजना है।

उन्होंने कहा कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। पशुपालन और डेयरी को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि खेती से जुड़े एक लाख किसानों, युवाओं और बेटियों को विशेष प्रशिक्षण देकर कृषि उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने का लक्ष्य है।

किसानों से प्राकृतिक खेती और हल्दी उत्पादन की जानकारी ली

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सिंगरौली के प्रगतिशील किसानों से संवाद भी किया। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती, श्रीअन्न उत्पादन और विशेष रूप से हल्दी की खेती के बारे में जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोन और गोपद नदियों के संगम वाला सिंगरौली जिला श्रीअन्न उत्पादन में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां कोदो और सामा जैसी फसलें प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि सिंगरौली और डिंडोरी के किसानों की पहल के आधार पर सरकार ने कोदो-कुटकी की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी का निर्णय लिया है।

किसानों ने मुख्यमंत्री को बताया कि पारंपरिक खेती की तुलना में जैविक खाद के इस्तेमाल से प्राकृतिक खेती में बेहतर लाभ मिल रहा है।

दिन में 10 घंटे बिजली देने के लिए फीडरों का विभक्तिकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगरौली के किसान पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीक और नई फसलों को भी अपना रहे हैं। उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में जिले में काफी संभावनाएं हैं।

उन्होंने बताया कि जिले में आटा मिल, राइस मिल, ऑयल मिल, दुग्ध उत्पाद, बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी नई इकाइयां स्थापित की गई हैं।

मुख्यमंत्री के मुताबिक किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से फीडरों का विभक्तिकरण किया गया है। इससे कृषि कार्यों के लिए बिजली की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।

फसल विविधीकरण और पशुपालन पर जोर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंगरौली के किसानों से खेती में फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की। उन्होंने किसानों से उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ पशुपालन और मछली पालन से जुड़ने का भी आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि खेती के साथ इन गतिविधियों को अपनाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने में मदद मिल सकती है।

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