September 14, 2026

यह खबर मुख्य रूप से मुंगेली जिले में बिजली कटौती और विभागीय अव्यवस्था को लेकर बढ़ती नाराजगी पर केंद्रित है।

⚡ मुख्य बातें

  • बारिश के मौसम में जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती और घंटों बिजली गुल रहने की शिकायतें बढ़ी हैं।
  • उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली बंद होने पर उन्हें फाल्ट का कारण और बिजली बहाली का अनुमानित समय स्पष्ट रूप से नहीं बताया जाता।
  • अधिकारियों के फोन नहीं उठाने या फोन उठाने पर उपभोक्ताओं को “लाइनमैन से बात करो” कहकर आगे भेजने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
  • टोल-फ्री शिकायत व्यवस्था को लेकर भी लोगों का कहना है कि सिर्फ शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके समाधान और स्थिति की जानकारी भी मिलनी चाहिए।

🕔 जरहागांव में 12 घंटे बिजली बंद

रविवार को जरहागांव नगर पंचायत और आसपास के गांवों में सुबह करीब 5 बजे बिजली गुल हुई और शाम करीब 5 बजे बहाल हुई।

करीब 12 घंटे की बिजली कटौती से:

  • पेयजल और निस्तारी व्यवस्था प्रभावित हुई।
  • घरेलू कामकाज और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ा।
  • लोगों ने अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें समस्या और बहाली के समय की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।

🌧️ प्री-मानसून मेंटेनेंस पर भी सवाल

लोगों ने बारिश से पहले किए गए प्री-मानसून मेंटेनेंस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि लाइनों, ट्रांसफार्मरों और अन्य विद्युत व्यवस्था का रखरखाव प्रभावी ढंग से किया गया था, तो बारिश के दौरान बार-बार लंबे समय तक फाल्ट क्यों हो रहे हैं।

😠 आंदोलन की चेतावनी

जरहागांव और आसपास के ग्रामीणों में बिजली व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों ने जल्द सुधार नहीं होने पर चक्काजाम, बिजली कार्यालय का घेराव और धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

❓ सबसे बड़ा सवाल

लोगों की मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि समय पर सूचना और जवाबदेही की है। उनका सीधा सवाल है कि बिजली बंद होने पर:

समस्या क्या है? बिजली कब तक आएगी? शिकायत पर कार्रवाई कौन कर रहा है? और लंबे समय तक बिजली गुल रहने की स्थिति में जवाबदेह अधिकारी कौन है?

बरसात के दौरान बिजली व्यवस्था के सामने चुनौती केवल फाल्ट सुधारने की नहीं, बल्कि विश्वसनीय आपूर्ति, त्वरित शिकायत निराकरण और उपभोक्ताओं को समय पर जानकारी देने की भी है।

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