November 6, 2026

बिलासपुर/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। इंडियन रॉक पाइथन (अजगर) के मुंह के अंदर बनी असामान्य गांठ को सर्जरी के जरिए निकाला गया। अंबिकापुर के वन्यजीव रेस्क्यूकर्ता सत्यम द्विवेदी की पहल पर अजगर को बेहतर उपचार के लिए बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी लाया गया, जहां विशेषज्ञों की मदद से उसका ऑपरेशन किया गया।

करीब साढ़े तीन घंटे तक चले ऑपरेशन में अजगर के मुंह के अंदर बनी गांठ को निकाल दिया गया। सर्जरी के बाद उसे ड्रिप और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता दी गई। अब उसके पूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए लगातार देखरेख की जरूरत है।

रेस्क्यू के दौरान मुंह में दिखी असामान्य सूजन

जानकारी के अनुसार, सत्यम द्विवेदी ने अजगर के रेस्क्यू के दौरान उसके मुंह में असामान्य सूजन देखी। शुरुआत में उन्हें आशंका हुई कि संभवतः अजगर ने कोई शिकार निगल लिया है, जिसके कारण उसका मुंह फूला हुआ दिखाई दे रहा है।

हालांकि, स्थिति सामान्य नहीं लगने पर उन्होंने गांठ या ट्यूमर की आशंका जताई। इसके बाद वन विभाग, सरगुजा से आवश्यक अनुमति लेकर अजगर को बेहतर उपचार के लिए बिलासपुर ले जाया गया।

कानन पेंडारी में विशेषज्ञों ने किया परीक्षण

कानन पेंडारी में वन्यजीव विशेषज्ञ एवं उप संचालक डॉ. चंदन ने अजगर की स्थिति का आकलन किया। बेहतर उपचार के लिए उसे डॉ. पियूष दुबे के पास भेजा गया, जो पेट मेडिक्स के संचालक हैं।

डॉ. पियूष दुबे ने आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और अपने अनुभव की मदद से अजगर की सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान उसके मुंह के अंदर बनी असामान्य गांठ को शल्य चिकित्सा के माध्यम से निकाल दिया गया।

गंभीर स्थिति में हुआ ऑपरेशन, लगातार देखरेख जरूरी

जानकारी के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान अजगर की स्थिति गंभीर बताई गई। सर्जरी पूरी होने के बाद उसे ड्रिप और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय सहायता दी गई। चिकित्सकों के प्रयासों से उसकी जान बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

हालांकि, अजगर के पूरी तरह स्वस्थ होने के लिए निरंतर निगरानी और देखभाल आवश्यक है।

वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मामला

अजगर के मुंह के अंदर बनी असामान्य गांठ का ऑपरेशन वन्यजीव चिकित्सा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस तरह के मामलों में समय पर पहचान, विशेषज्ञों की मदद और उचित उपचार वन्यजीवों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

इस मामले को देश में अपनी तरह का पहला मामला होने का दावा करने से पहले संबंधित वैज्ञानिक अभिलेखों और विशेषज्ञों से पुष्टि आवश्यक होगी। फिलहाल, यह घटना वन्यजीव संरक्षण और सरीसृपों के उपचार में विशेषज्ञ चिकित्सा की भूमिका को रेखांकित करती है।


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