
मोहला-मानपुर। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत मोहला-मानपुर जिले के मानपुर विकासखंड स्थित महाराष्ट्र सीमा से लगे पिट्टेमेटा गांव में देखने को मिल रही है। यहां लाखों रुपये की लागत से बनाई गई पानी टंकी और टॉवर पिछले करीब दो वर्षों से महज शोपीस बनकर खड़े हैं, जबकि ग्रामीण आज भी नदी में झरिया बनाकर पीने का पानी जुटाने को मजबूर हैं।
कभी नक्सल प्रभावित रहे इस गांव में सुरक्षा व्यवस्था तो बेहतर हुई, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं कीं। बारिश के मौसम में चारों ओर पानी होने के बावजूद लोगों को स्वच्छ पेयजल के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत गांव में पानी टंकी और पाइपलाइन का निर्माण तो किया गया, लेकिन घर-घर तक जलापूर्ति की योजना आज तक पूरी नहीं हो सकी। शुरुआती दिनों में टंकी के नीचे लगे पाइप से कुछ समय तक पानी मिला, लेकिन गांव में बिछाई गई पाइपलाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त और लीकेज होने के कारण पूरी व्यवस्था ठप हो गई। नतीजतन टंकी महीनों से सूखी पड़ी है।
गांव में पहले से मौजूद सोलर आधारित छोटी पेयजल व्यवस्था भी ग्रामीणों की जरूरत पूरी नहीं कर पा रही है। टंकी में पर्याप्त जल भंडारण नहीं हो पाता और उससे जुड़े हैंडपंप के खराब होने व लीकेज के कारण नलों से केवल बूंद-बूंद पानी निकलता है। ऐसे में ग्रामीणों को घंटों इंतजार कर थोड़ा-सा पानी जुटाना पड़ता है।
पानी की इस गंभीर समस्या से परेशान ग्रामीण अब नदी में झरिया बनाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। महिलाओं और बच्चों को रोजाना पेयजल के लिए अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ रही है, जिससे उनकी दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है।
गांव के ग्राम पटेल ने शासन-प्रशासन से कई बार जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग की है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। दूसरी ओर, जल जीवन मिशन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई का आश्वासन देकर जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की योजनाओं का लाभ तभी सार्थक होगा, जब पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा वास्तव में लोगों के घरों तक पहुंचे। फिलहाल पिट्टेमेटा के ग्रामीणों के लिए जल जीवन मिशन की पानी टंकी सिर्फ एक खामोश ढांचा बनकर रह गई है, जबकि उनकी प्यास आज भी नदी के झरिया से ही बुझ रही है।