भोपाल। मध्य प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 28 सितंबर को भोपाल समेत प्रदेशभर में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया था। तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भोपाल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर मार्च किया। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोका और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

कांग्रेस SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रही है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है। वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इसे चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने की राजनीति बताया है।
भोपाल में चुनाव आयोग कार्यालय की ओर कांग्रेस का मार्च
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोका। बैरिकेड पार करने की कोशिश के दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर मौके से हटाया गया।
प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-काटने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग की।
जीतू पटवारी ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
प्रदर्शन से पहले जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि SIR के दौरान मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। उन्होंने हटाए गए नामों का विधानसभा और जिलेवार ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की थी।
पटवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना जरूरी है और SIR से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता होनी चाहिए।
कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि पार्टी चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में संशोधन और SIR की प्रक्रिया को लेकर अपने सवाल उठाती रहेगी।
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को बताया राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि चुनाव आयोग पर बिना ठोस प्रमाण के आरोप लगाना उचित नहीं है। बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के प्रदर्शन को चुनावी परिणामों से जोड़कर निशाना साधा और कहा कि यदि कांग्रेस के पास कोई ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
बीजेपी ने SIR को चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। वहीं चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया बताया है और हाल के विवाद के बीच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बैठकों के एजेंडे पहले साझा करने तथा बैठक की कार्यवाही जारी करने जैसे कदमों की घोषणा की है।
SIR को लेकर देशभर में चल रहा राजनीतिक विवाद
SIR को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का संशोधन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में भी यह मुद्दा अब राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख विषय बन गया है। 28 सितंबर को भोपाल में हुए प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग से जुड़े अपने सवालों को आगे भी उठाने की बात कही है, जबकि बीजेपी इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रही है।