
- अनूपपुर: 1,600 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना। निवेश करीब ₹22,000 करोड़, रोजगार करीब 7,000।
- इस परियोजना के लिए MPPMCL के साथ 27 जनवरी 2026 को PPA हो चुका है। भूमि अधिग्रहण पूरा होने और L&T व Tata Projects को काम मिलने की जानकारी दी गई है।
- छिंदवाड़ा: 1,500 मेगावाट की पातालकोट पंप्ड स्टोरेज परियोजना, प्रस्तावित निवेश ₹7,500 करोड़ और करीब 4,000 रोजगार।
- रतलाम-उज्जैन: 250 मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजनाएं विकासाधीन हैं। निवेश करीब ₹2,000 करोड़ और लगभग 500 रोजगार।
- मंदसौर: टोरेंट की 36 मेगावाट क्षमता की पवन ऊर्जा इकाई पहले से संचालित है।
- समूह एक और 800 मेगावाट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसमें करीब ₹11,000 करोड़ निवेश और 3,500 रोजगार का प्रावधान बताया गया है।
- भविष्य की बिजली जरूरतों को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार 2,800 मेगावाट ताप विद्युत क्षमता की DBFOO आधार पर निविदा प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने टोरेंट पावर को इसमें भाग लेने का निमंत्रण दिया है।
- पीथमपुर: टोरेंट ग्रुप की USFDA-अनुमोदित फार्मा इकाई करीब ₹300 करोड़ के निवेश से संचालित है और 400 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।
- टोरेंट पावर की स्थापित उत्पादन क्षमता करीब 5.1 GW बताई गई है और कंपनी का लक्ष्य 2030 तक करीब 10 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करना है।
बड़ी तस्वीर
मध्यप्रदेश में टोरेंट का निवेश केवल पारंपरिक ताप विद्युत तक सीमित नहीं है। थर्मल पावर, पवन ऊर्जा, पंप्ड स्टोरेज, फार्मा और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में एक साथ निवेश से राज्य की बिजली उपलब्धता, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। खास तौर पर पंप्ड स्टोरेज और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।