क्या हुआ?
- ग्वालियर की जर्जर सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में लगातार दो दिन सुनवाई हुई।
- कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए सड़कों की वास्तविक स्थिति और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
- नगर निगम के अनुसार शहर में कुल 129 सड़कें हैं।
- इनमें से सिर्फ 62 सड़कें चलने योग्य बताई गईं, जबकि 24 सड़कें पूरी तरह खराब/जर्जर स्थिति में हैं।

अब मौके पर होगी वैज्ञानिक जांच
हाईकोर्ट के निर्देश पर एडवोकेट कमिश्नर और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बनाई जाएगी। टीम:
- मौके पर जाकर सड़कों की खुदाई करेगी।
- सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री के सैंपल लेगी।
- सैंपलों की वैज्ञानिक जांच कराएगी।
- निर्माण की गुणवत्ता और सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी।
निगम से मांगे मूल दस्तावेज
कोर्ट ने सड़क निर्माण से जुड़े पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा सड़कों पर खर्च की गई राशि और Measurement Books (माप पुस्तिकाओं) समेत मूल दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘सुरंग वाली सड़क’ पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान ग्वालियर की चर्चित ‘सुरंग वाली सड़क’ का मामला भी उठा। कोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर से पूछा कि ऐसी सड़क का निर्माण कैसे हुआ और उसकी गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई थी।
अब विशेषज्ञों की जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़कों के निर्माण में तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं और कहीं अनियमितता हुई है या नहीं। यदि जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई हो सकती है।
अगली सुनवाई: 13 अगस्त।