गरियाबंद। कचना धुर्वा पैरी नदी ग्राम सभा फेडरेशन, बिंद्रानवागढ़ के नेतृत्व में बुधवार को क्षेत्र की 30 पंचायतों से जुड़े ग्राम सभा प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और हजारों ग्रामीणों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट से करीब तीन किलोमीटर पहले से विशाल रैली निकाली और नारेबाजी करते हुए जिला प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं।

प्रदर्शनकारियों ने विस्थापन के विरोध, PESA और FRA के प्रभावी क्रियान्वयन, हाथी प्रभावित गांवों की सुरक्षा, किसानों को उचित मुआवजा और ग्राम सभाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
कलेक्ट्रेट के बाहर भारी सुरक्षा, शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन
ग्रामीणों की रैली कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले पुलिस ने बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था की थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर डटे रहे।
प्रदर्शन के बाद फेडरेशन की ओर से राज्यपाल, मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर के नाम तीन अलग-अलग ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपे गए।
खास बात यह रही कि कलेक्टर स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचकर ज्ञापन लेने आए और प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा की। कलेक्टर ने जिला स्तर से जुड़ी मांगों पर प्रशासन की ओर से कार्रवाई का भरोसा दिया। वहीं, शासन स्तर की मांगों को संबंधित विभाग और सरकार तक पत्र के माध्यम से पहुंचाने की बात कही।
PESA और FRA को लेकर ग्राम सभाओं ने उठाई आवाज
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में PESA और वन अधिकार अधिनियम (FRA) की भावना के अनुरूप वास्तविक रूप से क्रियान्वयन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्राम सभा को केवल बैठक या कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, वन अधिकार अधिनियम ग्राम सभा और वन अधिकार धारकों को जंगल, जैव विविधता तथा सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका देता है।
संजय नेताम ने कहा कि विस्थापन या जंगल से जुड़े किसी बड़े निर्णय में ग्रामीणों को केवल सूचना देने के बजाय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ग्राम सभा की भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास और संरक्षण, दोनों के पक्ष में हैं, लेकिन संविधान और कानून के प्रावधानों की कीमत पर नहीं।
हाथी प्रभावित गांवों में सुरक्षा और मुआवजे की मांग
जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने हाथी प्रभावित गांवों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि हाथियों के कारण किसानों की फसल, मकान और आजीविका प्रभावित हो रही है।
उन्होंने मांग की कि प्रभावित गांवों में केवल मुआवजा देने के बजाय स्थायी सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाए। इसके साथ ही सौर लाइट, पर्याप्त टॉर्च, सड़क किनारे साफ-सफाई और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय किए जाएं।
उन्होंने जनहानि और फसल क्षति के मामलों में समयबद्ध और उचित मुआवजा देने की मांग भी रखी।
विस्थापन को लेकर ग्राम सभाओं की आपत्ति
कचना धुर्वा पैरी नदी ग्राम सभा फेडरेशन के अध्यक्ष छबीराम नेताम ने कहा कि विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए गांवों की जमीन चिन्हित करने से पहले संबंधित ग्राम सभाओं से विधिवत चर्चा की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनकी ग्राम सभाएं अपनी जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की जमीन और सामुदायिक संसाधनों से जुड़े किसी भी निर्णय में ग्राम सभा को विश्वास में लिया जाना जरूरी है।
छबीराम नेताम के मुताबिक, विस्थापन जैसे मुद्दों का समाधान केवल किसी विभागीय कार्यालय में नहीं, बल्कि प्रभावित ग्राम सभाओं के साथ संवाद के जरिए किया जाना चाहिए।
30 पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल
प्रदर्शन में फेडरेशन के उपाध्यक्ष नेपाल सोरी, उदेराम नेताम, रामसिंह ध्रुव, सचिव रामेश्वर कपिल, बलिराम नेताम, कोषाध्यक्ष उमेश दाऊ, प्रेमसाय जगत, जगतुराम ध्रुवा, कमलेश, दिनेश नेताम, दिनेश ठाकुर, गूंजेश कपिल, उदराज सोरी, कृष्णा नाग, प्रकाश ठाकुर, शेवया दीवान, ममता मरकाम, हेमकुमारी नेताम, बिसनतिन बाई धुर्वा और तुलसी ध्रुव सहित बड़ी संख्या में ग्राम सभा प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- PESA और FRA का प्रभावी क्रियान्वयन
- विस्थापन से पहले ग्राम सभाओं से विधिवत चर्चा
- ग्राम सभा के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा
- हाथी प्रभावित गांवों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था
- फसल और जनहानि के मामलों में उचित एवं समयबद्ध मुआवजा
- सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण में ग्राम सभाओं की भूमिका सुनिश्चित करना
- प्रभावित ग्रामीणों के साथ संवाद के जरिए विस्थापन संबंधी समाधान