भोपाल। राजधानी भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट जारी होने के बाद अब इसके प्रावधानों को लेकर सियासत तेज हो गई है। सरकार ने इसे भोपाल के व्यवस्थित विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को ध्यान में रखकर तैयार किया है। हालांकि, ड्राफ्ट में वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र से जुड़े सड़क प्रस्तावों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि संरक्षित वन क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क के प्रावधान से जंगल और वन्यजीव प्रभावित हो सकते हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि मास्टर प्लान में प्राकृतिक क्षेत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है और शहर के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।
वन क्षेत्रों में 18, 24 और 60 मीटर चौड़ी सड़कों पर सवाल
प्रस्तावित मास्टर प्लान को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों में भोपाल के वन क्षेत्रों में प्रस्तावित सड़क नेटवर्क प्रमुख है। आरोप है कि कालिया करवा, चौकी, मंडोर और मंदोरी समेत ऐसे क्षेत्रों में भी सड़कें प्रस्तावित की गई हैं, जहां बाघों की आवाजाही होती है।
कांग्रेस का आरोप है कि इन इलाकों में 18 मीटर, 24 मीटर और 60 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रावधान किए गए हैं। पार्टी का दावा है कि इससे वन क्षेत्र और वन्यजीवों के आवास पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, प्रस्तावित मास्टर प्लान के आधिकारिक विवरण में वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्रों के संरक्षण के प्रावधान किए जाने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी ड्राफ्ट जारी करते हुए भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण को योजना का हिस्सा बताया है।
मास्टर प्लान 2031 का भी दिया हवाला
कांग्रेस नेताओं ने मौजूदा ड्राफ्ट पर सवाल उठाते हुए पूर्व प्रस्तावित मास्टर प्लान 2031 का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि 2031 के प्रस्ताव में भी वन क्षेत्रों के बीच सड़क नेटवर्क को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
कांग्रेस का आरोप है कि पुराने विवादों से सबक लेने के बजाय नए ड्राफ्ट में भी वन क्षेत्रों से जुड़े सड़क प्रस्तावों को जगह दी गई है। हालांकि, मौजूदा मास्टर प्लान अभी अंतिम रूप में लागू नहीं हुआ है। ड्राफ्ट पर नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं।
पीसी शर्मा बोले- रसूखदारों को फायदा पहुंचाने की तैयारी
मामले पर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान में कई स्तर पर गड़बड़ियां हैं और रसूखदारों को फायदा पहुंचाने के लिए वन क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले प्रावधान किए गए हैं।
पीसी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पहले मास्टर प्लान के प्रावधानों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराएगी। जरूरत पड़ने पर आगे वैधानिक कदम उठाने की बात भी उन्होंने कही।
भाजपा बोली- जंगल भी बचेंगे, शहर का विकास भी होगा
भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी बृज गोपाल लोया ने कांग्रेस के आरोपों पर कहा कि मास्टर प्लान शहर के व्यवस्थित विकास के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि योजना में विभिन्न प्रावधानों और गाइडलाइन का अध्ययन किया गया है।
लोया के मुताबिक शहर के जंगलों को किसी भी तरह से बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उनका कहना है कि जंगलों का संरक्षण और शहर का विकास दोनों साथ-साथ किया जाएगा।
ड्राफ्ट में ग्रीन जोन बढ़ाने का भी प्रावधान
प्रस्तावित भोपाल मास्टर प्लान 2047 में ग्रीन जोन का हिस्सा बढ़ाने का प्रावधान भी किया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार ग्रीन जोन को मौजूदा 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। साथ ही हरित TDR की व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है, ताकि हरित क्षेत्र में आने वाली निजी भूमि के स्वामियों को क्षतिपूर्ति और विकासकर्ताओं को TDR के माध्यम से अतिरिक्त विकास की सुविधा मिल सके।
ड्राफ्ट में सिटी फॉरेस्ट, जियोलॉजिकल स्पेस और बोटैनिकल गार्डन के लिए अलग जोन का भी प्रावधान बताया गया है। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के साथ भोपाल में बेहतर मोबिलिटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
अभी अंतिम नहीं है मास्टर प्लान, दावे-आपत्तियों के बाद होगा फैसला
भोपाल मास्टर प्लान 2047 फिलहाल प्रस्तावित ड्राफ्ट के स्तर पर है। सरकार ने इस पर नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। दावे-आपत्तियों के परीक्षण के बाद जरूरत के अनुसार संशोधन किए जा सकते हैं और इसके बाद अंतिम प्रारूप सामने आएगा।
ऐसे में वन क्षेत्रों में प्रस्तावित सड़कों को लेकर उठ रहे सवालों पर अब दावे-आपत्ति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन को लेकर आने वाले सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट में बदलाव की संभावना बनी हुई है।