November 6, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शहरों और तेजी से विकसित हो रहे नगरीय क्षेत्रों में जमीन के उपयोग को लेकर नियमों में बदलाव की तैयारी है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रारूप जारी किया है। प्रस्तावित संशोधन में अलग-अलग भूमि उपयोग श्रेणियों में सामान्यतः निषिद्ध गतिविधियों की सूची को स्पष्ट किया गया है।

प्रस्ताव के तहत आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक-अर्धसार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद और कृषि भूमि के उपयोग से जुड़ी कई गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रावधान रखा गया है।

सरकार ने प्रस्तावित संशोधन पर आम लोगों और प्रभावित पक्षों से राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिनों के भीतर आपत्ति और सुझाव मांगे हैं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यानी फिलहाल ये प्रावधान प्रस्तावित हैं और इन्हें अंतिम नियम नहीं माना जा सकता।

आवासीय जमीन पर भारी और जोखिम वाली गतिविधियां प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव

प्रस्तावित सूची में आवासीय क्षेत्रों के लिए कई गतिविधियों को सामान्यतः निषिद्ध रखा गया है। इनमें हरित, नारंगी, लाल और नीले श्रेणी के उद्योग, गोदाम, बूचड़खाने, कबाड़खाने, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार और बड़े परिवहन टर्मिनल शामिल हैं।

इसके अलावा थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, दुग्ध उत्पादन और कुक्कुट पालन जैसी गतिविधियों को भी प्रतिबंधित सूची में रखा गया है। दाह संस्कार और कब्रिस्तान से संबंधित उपयोग भी इस सूची में शामिल हैं।

वाणिज्यिक जमीन पर भी कई गतिविधियों पर रोक

वाणिज्यिक भूमि उपयोग क्षेत्र में भी कई गतिविधियों को सामान्यतः निषिद्ध करने का प्रस्ताव है। इसमें नारंगी, लाल और नीले श्रेणी के उद्योग, खतरनाक या विषाक्त रसायनों का भंडारण और विस्फोटक सामग्री का भंडारण शामिल है।

पशुपालन, मछली पालन, दुग्ध उत्पादन और कुक्कुट पालन के साथ दाह संस्कार तथा कब्रिस्तान से संबंधित गतिविधियों को भी प्रस्तावित प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है।

औद्योगिक क्षेत्र में आवासीय टाउनशिप पर प्रस्तावित रोक

औद्योगिक भूमि उपयोग के लिए प्रस्तावित नियमों में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप को सामान्यतः निषिद्ध गतिविधियों में रखा गया है। हालांकि, अनुमत कर्मचारी आवास, छात्रावास और शयनागार को इससे अलग रखा गया है।

इसके अलावा विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण और गैस गोदाम जैसी गतिविधियों को भी प्रस्तावित निषिद्ध उपयोग में शामिल किया गया है।

कृषि जमीन पर बड़े मॉल और उद्योग भी प्रतिबंधित सूची में

कृषि भूमि के उपयोग को लेकर भी प्रस्ताव में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। कृषि भूमि पर आवासीय अभिन्यास, वाणिज्यिक परिसर, बड़े वाणिज्यिक प्रोजेक्ट, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग और विभिन्न श्रेणी के उद्योगों को सामान्यतः निषिद्ध गतिविधियों में रखा गया है।

प्रस्ताव में उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाओं और बड़े मॉल को भी कृषि भूमि उपयोग की प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि भूमि के अनियंत्रित व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नियामकीय ढांचा तय करना है।

15 दिन में दे सकेंगे आपत्ति और सुझाव

आवास एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार प्रस्तावित प्रारूप पर प्रभावित व्यक्ति अपनी आपत्ति या सुझाव सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के कार्यालय में लिखित रूप से दे सकते हैं। सुझाव ई-मेल के माध्यम से भी भेजने की व्यवस्था है।

विभाग प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। ऐसे में प्रस्तावित संशोधन पर अंतिम निर्णय होने तक वर्तमान नियमों की स्थिति बनी रहेगी।

ध्यान देने वाली बात: यह संशोधन अभी प्रारूप के स्तर पर है। राजपत्र में प्रकाशन के बाद 15 दिनों की अवधि में प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद ही संशोधन के अंतिम स्वरूप और लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।

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