November 4, 2026

छत्तीसगढ़ में पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक नई पहल की जा रही है। धमतरी जिले के ग्राम जोरातराई नवीन को प्रदेश का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने की तैयारी है। इसके तहत धान की खेती में पानी की खपत और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग (AWD) तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही जिले में दलहन और तिलहन फसलों का रकबा दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस पहल का उद्देश्य जल संरक्षण, कृषि विविधीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के जरिए टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत किसानों को नई कृषि तकनीकों से जोड़ने के साथ उनकी उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

AWD तकनीक से धान की खेती में पानी की खपत होगी कम

धान की खेती में लगातार खेतों को पानी से भरा रखने के बजाय जरूरत के अनुसार सिंचाई करने की पद्धति को अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग (AWD) कहा जाता है। इस तकनीक में खेतों को कुछ समय तक सूखने दिया जाता है और फिर आवश्यकता के मुताबिक पानी दिया जाता है।

इस पद्धति से सिंचाई के पानी की बचत करने में मदद मिल सकती है। साथ ही धान के खेतों से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को भी कम करने की संभावना रहती है। यही वजह है कि जोरातराई नवीन को कार्बन न्यूट्रल गांव के रूप में विकसित करने की योजना में AWD तकनीक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले में इस तकनीक को अपनाने के लिए पात्र किसानों की लगभग 95 प्रतिशत ऑनबोर्डिंग, प्रशिक्षण और क्रियान्वयन संबंधी कार्य पूरे हो चुके हैं। इससे योजना को जमीन पर लागू करने की दिशा में प्रगति हुई है।

दलहन और तिलहन फसलों का रकबा दोगुना करने की तैयारी

धमतरी जिले में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए दलहन और तिलहन फसलों का रकबा दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए कलेक्टर ने ग्रामवार कार्ययोजना तैयार करने और किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने और सहकारी समितियों तथा खरीदी संस्थाओं की सुविधाओं का विस्तार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना और उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद करना है।

फसल विविधीकरण से किसानों को धान के अलावा अन्य फसलों की खेती के विकल्प मिल सकते हैं। इससे कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

कार्बन क्रेडिट से किसानों को मिल सकता है अतिरिक्त लाभ

जोरातराई नवीन को कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने की पहल में ऐसी कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनसे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम हो सके। इसके साथ ही कार्बन क्रेडिट के माध्यम से पात्र किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ दिलाने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

हालांकि, किसानों को कार्बन क्रेडिट से वास्तविक लाभ कितना मिलेगा, यह संबंधित योजना की व्यवस्था, पात्रता के नियमों और उत्सर्जन में कमी के सत्यापन पर निर्भर करेगा। इसलिए इससे मिलने वाली संभावित आय को फिलहाल निश्चित लाभ के रूप में नहीं देखा जा सकता।

विभागों को समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश

कलेक्टर ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। योजना में जल संरक्षण, कृषि विविधीकरण और पर्यावरण अनुकूल खेती को एक साथ बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जा रहा है।

यदि जोरातराई नवीन को कार्बन न्यूट्रल गांव के रूप में विकसित करने का मॉडल सफल रहता है, तो इससे छत्तीसगढ़ के दूसरे गांवों में भी पानी बचाने वाली कृषि तकनीकों और दलहन-तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित करने का रास्ता खुल सकता है।

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