राजनांदगांव/खैरागढ़। डोंगरगढ़-खैरागढ़ इलाके में तेंदुए की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। देर रात ढारा से घोटिया रोड पर एक बार फिर तेंदुआ दिखाई दिया। ग्रामीणों ने तेंदुए को सड़क के पास देखा और उसका वीडियो भी बना लिया। तेंदुए के बार-बार आबादी और सड़क के आसपास नजर आने से क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

फार्म हाउस के पास देर रात दिखा तेंदुआ
जानकारी के मुताबिक, तेंदुआ रात करीब 10 बजे ढारा निवासी धवल चावड़ा के फार्म हाउस के पास दिखाई दिया। अचानक तेंदुआ नजर आने से आसपास मौजूद ग्रामीणों में हलचल मच गई। कुछ लोगों ने सुरक्षित दूरी से उसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।
वीडियो सामने आने के बाद इलाके में एक बार फिर तेंदुए की मौजूदगी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
इलाके में पहले भी कई बार नजर आ चुका है तेंदुआ
बताया जा रहा है कि ढारा-घोटिया क्षेत्र में तेंदुए का दिखना कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ समय से डोंगरगढ़-खैरागढ़ क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर तेंदुए की मौजूदगी के वीडियो और तस्वीरें सामने आती रही हैं।
सितंबर में डोंगरगढ़-खैरागढ़ मार्ग पर भी एक तेंदुआ पुल पर बैठा हुआ दिखाई दिया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के चलते ग्रामीणों में रात के समय सड़क पर आवाजाही को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
ग्रामीणों ने वन विभाग की निगरानी पर उठाए सवाल
तेंदुए के बार-बार सड़क और आबादी के आसपास पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि तेंदुए की मौजूदगी लगातार सामने आ रही है, तो क्षेत्र में नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।
ढारा से घोटिया का इलाका दो जिलों की सीमा से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे में खैरागढ़ और राजनांदगांव वन विभाग के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण हो जाता है। ग्रामीणों का सवाल है कि लगातार सामने आ रहे वीडियो के बीच वन विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
तेंदुए और इंसान के बीच अब तक संघर्ष की घटना नहीं
हालांकि, अब तक इस इलाके में तेंदुए और इंसान के बीच संघर्ष की कोई घटना सामने नहीं आई है। इसके बावजूद वन्यजीव के लगातार आबादी और सड़क के नजदीक दिखाई देने से सतर्कता जरूरी मानी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ लोगों को भी रात में जंगल और सुनसान इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की जरूरत है।
पहले भी सामने आ चुका है तेंदुए के शिकार का मामला
इस पूरे घटनाक्रम को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसी खैरागढ़-डोंगरगढ़ वन क्षेत्र में पहले तेंदुए के अवैध शिकार का मामला सामने आ चुका है। बनबोड़ क्षेत्र में मादा तेंदुए की हत्या के मामले में सात आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी।
ऐसे में वन विभाग के सामने चुनौती दोहरी है—एक ओर तेंदुए की मौजूदगी वाले इलाकों में ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी ओर वन्यजीव को अवैध शिकार जैसी घटनाओं से बचाना।
हादसा होने से पहले निगरानी बढ़ाने की मांग
फिलहाल ढारा-घोटिया रोड पर तेंदुए के दिखाई देने से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। लेकिन लगातार सामने आ रही तेंदुए की मौजूदगी को देखते हुए ग्रामीण अब पहले से निगरानी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से निगरानी, गश्त और जागरूकता पर जोर दिया जाना चाहिए। तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग की टीमों की सक्रियता आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगी।