जगदलपुर। ऐतिहासिक सीरासार भवन में बस्तर दशहरा की दूसरी महत्वपूर्ण रस्म ‘डेरी गड़ाई’ विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। सदियों पुरानी इस परंपरा के तहत बिरिंगपाल से लाई गई सरई की पवित्र टहनियों की पूजा-अर्चना कर उनकी स्थापना की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक प्रमुख और श्रद्धालु मौजूद रहे।

डेरी गड़ाई के साथ आगे बढ़ती है रथ निर्माण की परंपरा
बस्तर की मान्यता और परंपरा के अनुसार, डेरी गड़ाई की रस्म के बाद बस्तर दशहरा के भव्य रथ निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति मिलती है। यह आयोजन बस्तर की धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
रस्म के दौरान बस्तर सांसद महेश कश्यप, कलेक्टर आकाश छिकारा सहित जनप्रतिनिधि, सामाजिक प्रमुख, मांझी-चालकी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
सांसद महेश कश्यप बोले- भव्य रूप में होगा बस्तर दशहरा
सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा से जुड़े आगामी सभी विधानों को भी इसी तरह श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बस्तर दशहरा को भव्य रूप देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर में बदले हालात के बीच देश-दुनिया से पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में बस्तर की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को देश और दुनिया के सामने रखने का अवसर मिलेगा।
कलेक्टर बोले- परंपरा के अनुसार होंगी आगामी रस्में
कलेक्टर आकाश छिकारा ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बस्तर दशहरा गरिमामय तरीके से मनाया जा रहा है। आगे होने वाली सभी रस्में भी निर्धारित परंपरा और विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराई जाएंगी।
अब बस्तर दशहरा में काछनगादी और जोगी बिठाई जैसी महत्वपूर्ण रस्में होंगी। इन आयोजनों के साथ बस्तर दशहरा अपने अगले चरण में प्रवेश करेगा और आगामी दिनों में पर्व से जुड़े अन्य पारंपरिक विधान भी संपन्न होंगे।