बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दारुल कजा से जारी तलाक के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। बिलासपुर निवासी उज्मा बानो ने इदारा-ए-शरिया दारुल कजा के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने फिलहाल उज्मा बानो का अपने पति रजा रहमान के साथ वैवाहिक दर्जा बरकरार रखने का निर्देश दिया है।

दारुल कजा के तलाक आदेश को दी चुनौती
उज्मा बानो ने अपनी याचिका में बताया कि रायपुर के टिकरापारा स्थित इदारा-ए-शरिया दारुल कजा की मुहर और आदेश के आधार पर उन्हें दूसरा तलाक दिए जाने की कार्रवाई की गई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हमीदा सिद्दीकी और अधिवक्ता महिमा चंद्रा ने पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि देश के कानून में किसी समानांतर या ‘इस्लामिक कोर्ट’ के गठन का प्रावधान नहीं है और ऐसे निकाय को न्यायिक रूप से तलाक देने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
पति और दारुल कजा को आगे की कार्रवाई से रोका
हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत उज्मा बानो का वैवाहिक दर्जा फिलहाल बरकरार रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पति रजा रहमान और दारुल कजा को तलाक से संबंधित आगे की कार्रवाई करने से भी रोक दिया है।
अदालत ने प्रथमदृष्टया दारुल कजा से जारी दूसरे तलाक के आदेश की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए यह अंतरिम संरक्षण दिया है। कोर्ट के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का भी हवाला दिया गया।
अगली सुनवाई 26 अक्टूबर के सप्ताह में
मामले में केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग, बिलासपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में रखने का निर्देश दिया है।