November 8, 2026

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 23 वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर सहायक यंत्री का पद संभाल रहे हेडमास्टर ओमप्रकाश सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर द्वारा उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर मूल विभाग में वापस भेजने के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपये की लागत लगाई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित विभाग चाहे तो नियमानुसार उनके खिलाफ विभागीय जांच कर सकता है।

1993 में शिक्षक बने, 2003 में हेडमास्टर पद पर पदोन्नति

मामला हेडमास्टर ओमप्रकाश सिंह से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार उन्होंने 1993 में शिक्षक के पद पर सेवा शुरू की थी और वर्ष 2003 में पदोन्नति के बाद प्रधान पाठक यानी हेडमास्टर बने।

ओमप्रकाश सिंह के पास सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री थी। इसी योग्यता के आधार पर उन्हें प्रतिनियुक्ति पर उपयंत्री का दायित्व दिया गया। बाद में उन्हें प्रभारी सहायक यंत्री का प्रभार भी सौंपा गया। इस तरह वह करीब 23 वर्षों तक प्रतिनियुक्ति पर सहायक यंत्री के रूप में कार्यरत रहे।

कलेक्टर ने 28 अप्रैल को समाप्त की थी प्रतिनियुक्ति

जबलपुर कलेक्टर ने प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत 28 अप्रैल को ओमप्रकाश सिंह की लंबे समय से चली आ रही प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी थी। इसके साथ ही उन्हें उनके मूल विभाग में वापस भेजने का आदेश जारी किया गया।

कलेक्टर के इस आदेश को चुनौती देते हुए ओमप्रकाश सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के फैसले पर आपत्ति जताई थी।

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर लगाया 10 हजार रुपये जुर्माना

मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने माना कि किसी कर्मचारी का लंबे समय तक प्रतिनियुक्ति पर बने रहना उसे उस पद पर स्थायी अधिकार प्रदान नहीं करता। ऐसे में कलेक्टर द्वारा प्रतिनियुक्ति समाप्त कर मूल विभाग में वापस भेजने के निर्णय में हस्तक्षेप का आधार नहीं है।

विभागीय जांच का भी रास्ता खुला

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करने के साथ याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपये की लागत भी लगाई है। इसके अलावा संबंधित विभाग को नियमानुसार विभागीय जांच शुरू करने की स्वतंत्रता दी गई है।

कोर्ट के आदेश के बाद अब ओमप्रकाश सिंह को अपने मूल विभाग में वापस लौटना होगा। वहीं विभाग, यदि उचित समझे, तो उनके खिलाफ अलग से विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *