धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में प्रार्थना और चंगाई सभाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच क्रिश्चियन फोरम ने बड़ा फैसला लिया है। फोरम के मुताबिक, जिले के करीब 40 चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों में गैर-ईसाइयों के प्रवेश को लेकर सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इनमें 117 साल पुराना मेनोनाइट चर्च भी शामिल बताया जा रहा है।

पिछले कुछ समय से धमतरी में प्रार्थना और चंगाई सभाओं को लेकर हिंदू संगठनों की ओर से विरोध और धर्मांतरण के आरोप लगाए जाते रहे हैं। दूसरी ओर, ईसाई संगठनों ने इन आरोपों को खारिज किया है। इसी बीच प्रार्थना सभाओं में शामिल होने के लिए 1,500 से अधिक आवेदन आने का दावा भी सामने आया था। हालांकि, प्रशासन की ओर से इन आवेदनों का अलग रिकॉर्ड होने की पुष्टि नहीं की गई है।
शांति समिति की बैठक के बाद सामने आया फैसला
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने विभिन्न पक्षों के साथ शांति समिति की बैठक की थी। बैठक में क्षेत्र में शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों में प्रवेश को लेकर सूचना बोर्ड लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
कुछ रिपोर्टों में जिला मुख्यालय के आठ चर्चों में प्रवेश संबंधी बोर्ड लगाए जाने की बात कही गई है, जबकि क्रिश्चियन फोरम से जुड़ी रिपोर्टों में जिले के करीब 40 चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों का उल्लेख है। इसलिए संबंधित स्थलों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है।
क्रिश्चियन फोरम ने बताई फैसले की वजह
क्रिश्चियन फोरम का कहना है कि प्रार्थना सभाओं में बाहरी लोगों के पहुंचने के बाद कई बार विवाद की स्थिति बनती है और पुलिस-प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता है। फोरम ने प्रार्थना सभाओं के जरिए प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने के आरोपों से इनकार किया है।
फोरम के अनुसार, चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों पर लगाए गए बोर्ड का उद्देश्य विवाद की संभावित स्थिति को रोकना और सुरक्षा एवं अनुशासन बनाए रखना है। फोरम के महासचिव डॉ. डायमंड फिलस ने भी कहा है कि असामाजिक तत्वों के प्रवेश को रोकने के उद्देश्य से सूचना बोर्ड लगाए गए हैं।
1500 आवेदनों को लेकर भी विवाद
धमतरी में प्रार्थना सभाओं में शामिल होने के लिए 1,500 से अधिक लोगों के आवेदन आने का दावा पिछले दिनों सामने आया था। क्रिश्चियन फोरम का कहना है कि लोगों ने अपनी इच्छा से प्रार्थना सभा में शामिल होने के संबंध में आवेदन दिए हैं।
हालांकि, कलेक्ट्रेट की आवक-जावक शाखा के प्रभारी टीआर ध्रुव के मुताबिक प्रार्थना सभा से संबंधित आवेदनों का अलग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। जिला पंचायत सीईओ जयंत नहाटा ने भी मामले की जानकारी लेकर आवेदनों का परीक्षण कराने की बात कही है। ऐसे में 1,500 आवेदनों का आंकड़ा फिलहाल संबंधित पक्ष के दावे के रूप में ही सामने आया है।
धर्मांतरण के आरोपों पर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
धमतरी में प्रार्थना और चंगाई सभाओं को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है। हिंदू संगठनों की ओर से इन सभाओं में प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने के आरोप लगाए जाते रहे हैं, जबकि ईसाई संगठन इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
अब गैर-ईसाइयों के प्रवेश को लेकर लगाए गए सूचना बोर्ड के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जानकारी जुटाने और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की बात कही गई है।