इंदौर। UPI के जरिए होने वाले बड़े मर्चेंट लेन-देन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर इंदौर के व्यापारिक संगठनों ने विरोध अभियान को व्यापक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने 23 सितंबर को प्रस्तावित ‘नो UPI डे’ के प्रचार-प्रसार के लिए बड़ी संख्या में पोस्टर छपवाए हैं। इन्हें शहर के अलग-अलग बाजारों और दुकानों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

व्यापारिक संगठन का कहना है कि अभियान के जरिए केवल व्यापारियों की आपत्ति ही नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान पर संभावित शुल्क के असर की जानकारी उपभोक्ताओं तक भी पहुंचाई जाएगी।
पोस्टर अभियान से बाजारों तक पहुंचेगा विरोध
अहिल्या चेम्बर्स के संयुक्त सचिव अक्षय जैन ने बताया कि 23 सितंबर को ‘नो UPI डे’ के जरिए व्यापारियों की सामूहिक आपत्ति शासन और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाने की योजना है।
इसके लिए बाजार स्तर पर पोस्टर लगाए जाएंगे। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार और विभिन्न व्यापारिक संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई है। संगठन अधिक से अधिक व्यापारियों और उपभोक्ताओं को अभियान से जोड़ना चाहता है।
अतिरिक्त शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ने की आशंका
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि डिजिटल भुगतान पर व्यापारियों की लागत बढ़ती है तो इसका असर कारोबार के खर्च पर पड़ सकता है। आगे चलकर इसका प्रभाव वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ने की आशंका भी व्यापारियों ने जताई है।
हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव प्रस्तावित शुल्क की अंतिम दर, किन लेन-देन पर शुल्क लागू होगा और व्यवस्था किस तरीके से लागू की जाएगी, इन बातों पर निर्भर करेगा। व्यापारियों की मांग है कि शुल्क लागू करने से पहले छोटे और मध्यम कारोबारियों के साथ उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का व्यापक अध्ययन किया जाए।
प्रदेश के व्यापारिक संगठनों से जुड़ने की अपील
अहिल्या चेम्बर्स के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल और महामंत्री गोपाल दास अग्रवाल ने प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों से अभियान में शामिल होने की अपील की है।
संगठन के अनुसार, अलग-अलग शहरों के व्यापारिक संगठनों से समर्थन और सहभागिता को लेकर संपर्क शुरू हो गया है। अब अभियान को इंदौर के साथ प्रदेश स्तर पर भी विस्तार देने की तैयारी की जा रही है।
डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं, अतिरिक्त लागत पर आपत्ति
अहिल्या चेम्बर्स का कहना है कि UPI देश की प्रमुख डिजिटल भुगतान व्यवस्थाओं में शामिल है और व्यापारी भी इसका नियमित इस्तेमाल करते हैं। संगठन का विरोध डिजिटल भुगतान व्यवस्था से नहीं, बल्कि व्यापारियों पर प्रस्तावित अतिरिक्त लागत से है।
व्यापारिक संगठन चाहते हैं कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे छोटे और मध्यम कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।
अब 23 सितंबर को प्रस्तावित ‘नो UPI डे’ के दौरान इंदौर के बाजारों में व्यापारियों की भागीदारी कितनी रहती है और शुल्क को लेकर उनकी मांग पर संबंधित संस्थाओं की क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी।