November 6, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों में लंबित मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने आंदोलन के अगले चरण का ऐलान किया है। JDA के अनुसार, कल से प्रदेशभर में OPD सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। हालांकि, मरीजों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए अस्पतालों के बाहर समानांतर OPD संचालित कर जरूरतमंद मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श देने की बात कही गई है।

स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा के बाद 7 दिन का दिया था समय

JDA के मुताबिक, 18 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ हुई बैठक में संगठन ने अपनी प्रमुख मांगें रखी थीं। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने मांगों के समाधान के लिए सात दिन का समय मांगा था।

इसके बाद JDA ने प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित कर दिया था और इस अवधि में डॉक्टरों ने नियमित चिकित्सा सेवाएं जारी रखीं।

तीन प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने का दावा

JDA का कहना है कि सात दिन की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी संगठन की तीन प्रमुख मांगों को लेकर अपेक्षित ठोस निर्णय या आदेश जारी नहीं हुआ है। इसके चलते संगठन ने अब आंदोलन को अगले चरण में ले जाने का फैसला किया है।

JDA छत्तीसगढ़ के आह्वान पर कल से प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों में OPD सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की गई है।

अस्पताल के बाहर समानांतर OPD

JDA ने कहा है कि आंदोलन के दौरान मरीजों को होने वाली परेशानी को कम करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए अस्पताल परिसर के बाहर समानांतर OPD संचालित करने और जरूरतमंद मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने की योजना है।

संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं, बल्कि चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों की लंबित मांगों के समयबद्ध एवं नीतिगत समाधान के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।

28 सितंबर से Emergency सेवाओं से हटने का प्रस्तावित चरण

JDA के मुताबिक, यदि निर्धारित समय में मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो 28 सितंबर से आंदोलन का अगला चरण प्रस्तावित है। इसमें PG Residents, MBBS Interns, Bonded Medical Officers और Senior Residents के Emergency सेवाओं से भी हटने की बात कही गई है।

JDA ने कहा कि संगठन ने अब तक सरकार के साथ संवाद और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यमों को प्राथमिकता दी है। संगठन ने सरकार से अपील की है कि मरीजों और चिकित्सकों दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए लंबित मांगों पर जल्द ठोस निर्णय लिया जाए।

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