जगदलपुर। बस्तर संभाग में आई बाढ़ को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं जगदलपुर विधायक किरण देव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष सी.आर. पाटिल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा को अलग-अलग पत्र लिखे हैं। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों के तत्काल पुनर्वास, विशेष राहत एवं मुआवजा पैकेज, जोरा नाला की नई डीपीआर और दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन योजना को मंजूरी देने की मांग की है।

खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद बस्तर में बाढ़
किरण देव ने अपने पत्र में कहा है कि ओडिशा स्थित इंद्रावती जलाशय के खातीगुड़ा बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने और क्षेत्र में हुई तेज बारिश के बाद इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया। उनके अनुसार, इससे जगदलपुर शहर के कई वार्ड और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। फसलों, मकानों, पशुधन और आम जनजीवन को नुकसान पहुंचने की बात भी पत्र में कही गई है।
देव ने अंतर्राज्यीय जल समन्वय और अग्रिम चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई है। हालांकि, बांध से पानी छोड़े जाने और बाढ़ के नुकसान से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अलग से की जानी बाकी है।
किसानों, मकान मालिकों और छोटे कारोबारियों के लिए विशेष मुआवजा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र और राज्य सरकार से बाढ़ प्रभावितों के लिए विशेष राहत एवं मुआवजा पैकेज देने का आग्रह किया है।
उन्होंने मांग की है कि:
- बाढ़ से नष्ट हुई खरीफ फसलों के लिए किसानों को प्रति एकड़ विशेष राहत राशि दी जाए।
- क्षतिग्रस्त कच्चे और पक्के मकानों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता से सहायता मिले।
- प्रभावित परिवारों को तत्काल जीवन-यापन के लिए आर्थिक मदद दी जाए।
- बाढ़ में बह गए पशुधन का सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए।
- छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के नुकसान का आकलन कर DBT के माध्यम से सहायता राशि पहुंचाई जाए।
जोरा नाला की नई DPR बनाने की मांग
किरण देव ने जोरा नाला की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नए सिरे से डीपीआर तैयार करने की मांग की है। पत्र में आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन कराने और जलप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक गेटेड रेगुलेटर स्ट्रक्चर विकसित करने का सुझाव दिया गया है।
उनका कहना है कि वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर इंद्रावती और जोरा नाला के बीच जलप्रवाह को नियंत्रित करने की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में बाढ़ का दबाव कम किया जा सके।
बाढ़ प्रबंधन के लिए कई सुझाव
देव ने इंद्रावती और उसकी सहायक नदियों के कैचमेंट क्षेत्रों में पौधरोपण, मृदा संरक्षण और कंटूर ट्रेंचिंग जैसे उपायों पर जोर दिया है। इसके अलावा उन्होंने इंद्रावती नदी में गाद हटाने के लिए ड्रेजिंग प्रोजेक्ट, संवेदनशील नदी तटों पर तटबंध और जगदलपुर के लिए एकीकृत स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने का सुझाव दिया है।
इन उपायों का उद्देश्य बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के दौरान जल निकासी को बेहतर करना और शहरी इलाकों में जलभराव का जोखिम कम करना है।
24 से 48 घंटे पहले मिले बाढ़ की चेतावनी
किरण देव ने खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के समय और मात्रा की जानकारी छत्तीसगढ़ प्रशासन तक रियल-टाइम में पहुंचाने की व्यवस्था बनाने की मांग की है।
उन्होंने सुझाव दिया है कि केंद्रीय जल आयोग (CWC) को इस व्यवस्था में नोडल एजेंसी बनाया जाए और इंद्रावती बेसिन में सेंसर आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाए। इसके जरिए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को पानी छोड़े जाने की जानकारी 24 से 48 घंटे पहले मिल सके और जरूरत पड़ने पर समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
केंद्रीय टीम भेजने और विशेष बस्तर पैकेज की मांग
देव ने बाढ़ से हुए नुकसान के भौतिक सत्यापन के लिए केंद्र की अंतर-मंत्रालयीन टीम बस्तर भेजने का भी आग्रह किया है। उन्होंने प्रभावित इलाकों के लिए विशेष राहत, पुनर्वास और बाढ़ प्रबंधन पैकेज को जल्द मंजूरी देने की मांग की है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को लिखे पत्रों में भी देव ने तत्काल राहत के साथ भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने पर जोर दिया है।