बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड के चुनाव की प्रक्रिया तत्काल फिर से शुरू करने का आदेश दिया है। 7 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने उन हालिया नोटिसों और पत्रों को निरस्त कर दिया, जिनके जरिए मतगणना की प्रक्रिया रोक दी गई थी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित नियमों के तहत चुनाव प्रक्रिया पूरी होने से पहले उसे रोकने का अधिकार नहीं है। इस फैसले के बाद बोर्ड चुनाव की मतगणना और आगे की प्रक्रिया फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
यह मामला रिट याचिका WPC No. 5135 of 2026 से जुड़ा है। याचिका डॉ. ऐश्वर्या कुमार साहू, डॉ. रजनीश जायसवाल, डॉ. निशांत कौशिक, डॉ. सुनील कुमार टंडन और जितेंद्र सिंह ठाकुर सहित कई उम्मीदवारों ने दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा और अधिवक्ता सजल कुमार गुप्ता ने पैरवी की। याचिका में चुनाव अधिकारी, आयुष विभाग के निदेशक और एक जांच समिति की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।
29 और 30 सितंबर के नोटिसों को दी गई थी चुनौती
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने 29 और 30 सितंबर 2026 को चुनाव प्रक्रिया रोकने के लिए कई नोटिस जारी किए थे। इस कार्रवाई के लिए छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी नियम, 1973 के नियम 17 का हवाला दिया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नियम 17 के कानूनी दायरे की व्याख्या की और कहा कि यह प्रावधान राज्य सरकार को चुनाव संपन्न होने के बाद उसे शून्य घोषित करने का अधिकार देता है। इसमें जारी चुनाव प्रक्रिया को बीच में रोकने या स्थगित करने का प्रावधान नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया गया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में बोद्दुला कृष्णैया एवं अन्य बनाम राज्य चुनाव आयुक्त और भारत निर्वाचन आयोग बनाम अशोक कुमार जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख किया।
अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से संबंधित कानूनी सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए कहा कि चुनाव शुरू होने के बाद मतगणना या परिणाम की घोषणा रोकने के लिए नियमों के विपरीत हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
नियम 17 के तहत चुनाव पूरा होने के बाद ही कार्रवाई संभव
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियम 17 के तहत किसी चुनाव को शून्य घोषित करने की कार्रवाई चुनाव पूरा होने के बाद ही की जा सकती है। इसलिए मतगणना रोकने के लिए जारी किए गए नोटिस और पत्र वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाए गए।
अदालत ने संबंधित नोटिसों और पत्रों को निरस्त करते हुए चुनाव प्रक्रिया तुरंत फिर से शुरू करने का आदेश दिया। इस फैसले से छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड के चुनाव की लंबित मतगणना आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।