
छत्तीसगढ़ में सुरक्षा के साथ ‘खिलवाड़’! CISF कैंपों में बाहरी महिला की अनधिकृत पहुंच पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की सुरक्षा व्यवस्था पर एक अत्यंत गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। न्यूज़ को प्राप्त पुख्ता जानकारी और जमीनी स्तर पर किए गए अवलोकन से खुलासा हुआ है कि CISF के सुरक्षा घेरे और प्रतिबंधित क्षेत्रों में एक बाहरी महिला की अनधिकृत पहुंच राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई है।
बीमा के नाम पर सुरक्षा में सेंध?
जानकारी के अनुसार, ‘प्रिया तिवारी’ (परिवर्तित नाम) नामक एक महिला, जो निजी बीमा (Insurance) क्षेत्र से जुड़ी है, CISF के उन कैंपों और चौकियों में आसानी से आवाजाही कर रही है, जहाँ आम नागरिकों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यह न केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन है, बल्कि बल की आंतरिक निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
DIG स्तर तक ‘हनी-ट्रैप’ का अंदेशा!
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू अधिकारियों की इसमें कथित संलिप्तता है। आरोप है कि उक्त महिला ने CISF के जवानों से लेकर DIG स्तर के अधिकारियों तक गहरी पैठ बना ली है। चर्चाओं के अनुसार, DIG दुबे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी इस महिला के साथ अत्यधिक निजी संबंधों में लिप्त हैं। आशंका जताई जा रही है कि ‘प्यार’ के नाम पर बल के महत्वपूर्ण मूवमेंट, सामरिक गतिविधियों और गोपनीय जानकारियां साझा की जा रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति ‘हनी-ट्रैप’ (Honey-trap) जैसी किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है, जिसका लाभ असामाजिक तत्वों या बाहरी ताकतों को मिल सकता है।
प्रशासनिक मिलीभगत का गंभीर आरोप:
खबरों के मुताबिक, इस महिला की सुविधा के लिए केवल CISF कैंप ही नहीं, बल्कि बस्तर पुलिस द्वारा भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। आरोप है कि जगदलपुर स्थित बस्तर पुलिस के ‘त्रिवेणी परिसर’ में इस महिला के रुकने की व्यवस्था पुलिस अधिकारियों द्वारा कराई जाती है। यह मिलीभगत बस्तर जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस और सुरक्षा बल के तालमेल पर भी गंभीर सवाल पैदा करती है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग:
पत्रकार आरव सिंह ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय और CISF के महानिदेशक (DG) से त्वरित और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि:
- इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हेतु एक स्वतंत्र समिति का गठन हो।
- शामिल अधिकारियों की डिजिटल गतिविधियों, कॉल रिकॉर्ड्स और व्हाट्सएप चैट की तकनीकी जांच कराई जाए।
- सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर कैंप में प्रवेश देने वाले और पुलिस परिसर उपलब्ध कराने वाले अधिकारियों पर कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्यवाही हो।
लेखक की बात:
पत्रकार ने स्पष्ट किया है कि यदि यह आरोप जांच में गलत साबित होते हैं, तो वे किसी भी कानूनी परिणाम को भुगतने के लिए तैयार हैं। लेकिन, यदि यह सुरक्षा में सेंध सही पाई जाती है, तो यह देशद्रोह के समान है और इसमें शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या गृह मंत्रालय और उच्च अधिकारी बस्तर में सुरक्षा के इस ‘अंदरूनी खेल’ पर कोई बड़ा एक्शन लेंगे?