November 6, 2026

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और गौरवशाली विरासत के प्रतीक बस्तर दशहरा में इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की विशेष उपस्थिति होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति मुर्मु ने 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

राष्ट्रपति की प्रस्तावित मौजूदगी को बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। इस अवसर पर बस्तर की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।

राष्ट्रपति को सौंपा गया मुख्यमंत्री का निमंत्रण

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का निमंत्रण पत्र सौंपे जाने के दौरान केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर लोकसभा सांसद महेश कश्यप और संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन मौजूद रहे।

निमंत्रण स्वीकार किए जाने के बाद 23 अक्टूबर को होने वाले मुरिया दरबार को लेकर तैयारियां तेज होने की उम्मीद है।

मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की मौजूदगी क्यों खास?

बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की जनजातीय परंपराओं, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक व्यवस्था का जीवंत प्रतीक माना जाता है। इसी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मुरिया दरबार है।

मुरिया दरबार के जरिए पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक प्रमुखों और स्थानीय समुदायों के बीच संवाद की परंपरा सामने आती है। बस्तर के सामाजिक जीवन में मांझी और चालकी जैसे पारंपरिक पदों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

राष्ट्रपति पहले भी कर चुकी हैं बस्तर की संस्कृति की सराहना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर की जनजातीय संस्कृति और विरासत से पहले भी जुड़ाव रहा है। फरवरी 2026 में जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम के अवसर पर उन्होंने बस्तर दशहरा को जनजातीय संस्कृति और भाईचारे का अनूठा उदाहरण बताया था।

उन्होंने बस्तर की प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।

बस्तर की संस्कृति और पर्यटन को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की ऐसी गौरवशाली परंपरा है, जिसकी पहचान देश-दुनिया में है। उनके मुताबिक, मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की उपस्थिति बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए गौरव का अवसर होगी।

उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपराओं और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। राष्ट्रपति की मौजूदगी से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

संस्कृति संरक्षण के साथ पर्यटन और रोजगार पर जोर

मंत्री राजेश अग्रवाल के अनुसार, राज्य सरकार बस्तर की पारंपरिक संस्कृति और विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी काम कर रही है। इसके जरिए स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा सांस्कृतिक विविधता और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण है और 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में राष्ट्रपति का स्वागत पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए विशेष अवसर होगा।

बस्तर की संस्कृति से राष्ट्रपति का रहा है विशेष जुड़ाव

फरवरी 2026 में बस्तर पंडुम के दौरान राष्ट्रपति ने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों, गुफाओं और प्राचीन संस्कृति को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने आधुनिक विकास के साथ बस्तर की समृद्ध विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

इसके अलावा, जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी राष्ट्रपति ने जनजातीय समुदायों की विकास यात्रा में भागीदारी और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण को महत्वपूर्ण बताया था।

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