November 7, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ में CSMCL के मैनपावर भुगतान मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) ने तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी संचालक बच्छ राज लोहिया उर्फ बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान पेश किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, शासकीय शराब दुकानों में कर्मचारियों के नाम पर पांच मैनपावर एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम के भुगतान के नाम पर कुल 182.98 करोड़ रुपये का कथित अतिरिक्त भुगतान किया गया।

आरोप है कि संबंधित कर्मचारियों को यह अतिरिक्त राशि दिए बिना या वास्तविक भुगतान से अधिक रकम के देयक प्रस्तुत कर निगम से भुगतान प्राप्त किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर अधिकारियों और अन्य लोगों को कमीशन के रूप में दिया गया। पूरक चालान रायपुर स्थित विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में प्रस्तुत किया गया है।

182.98 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान का मामला क्या है?

EOW/ACB के अनुसार, अपराध क्रमांक 44/2024 की विवेचना के दौरान दोनों आरोपियों की कथित संलिप्तता से जुड़े साक्ष्य मिलने के बाद पूरक चालान पेश किया गया। इस मामले में नवीन प्रताप सिंह तोमर, अनवर ढेबर, मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों सहित 12 आरोपियों के खिलाफ 18 मई 2026 को पहले ही चालान प्रस्तुत किया जा चुका है।

जांच के मुताबिक, छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) की शासकीय शराब दुकानों में कर्मचारी उपलब्ध कराने का काम विभिन्न मैनपावर एजेंसियों को दिया गया था। वर्ष 2019 की निविदा में नियमित वेतन के अतिरिक्त ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के कार्य के भुगतान का प्रावधान था।

नियमानुसार, एजेंसियों को पहले संबंधित कर्मचारियों को यह राशि देनी थी और उसके बाद CSMCL से भुगतान प्राप्त करना था। लेकिन जांच एजेंसी का आरोप है कि कर्मचारियों को अतिरिक्त रकम दिए बिना या वास्तविक भुगतान से अधिक राशि दिखाकर देयक प्रस्तुत किए गए और निगम से भुगतान हासिल किया गया।

जांच में शामिल कर्मचारियों के कथनों के अनुसार, उन्हें सामान्य मासिक वेतन मिलता था, जबकि उनके नाम पर ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त दिनों के काम के लिए ली गई रकम का भुगतान नहीं किया गया था।

पांच मैनपावर एजेंसियों को कितना भुगतान हुआ?

EOW/ACB की जांच के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के बीच पांच मैनपावर एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के काम और इन मदों पर सेवा शुल्क के रूप में कुल 1,82,98,48,675 रुपये, यानी करीब 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

जांच एजेंसी के मुताबिक, संबंधित एजेंसियां थीं:

  • सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड
  • प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड
  • ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड
  • अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड
  • ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड

एजेंसी का आरोप है कि कथित अतिरिक्त भुगतान का एक हिस्सा अधिकारियों और सिंडिकेट को कमीशन के रूप में दिया गया, जबकि शेष रकम संबंधित कंपनियों के पास रही। जांच में इस पूरे प्रकरण से शासन को लगभग 182.98 करोड़ रुपये की हानि होने की बात कही गई है।

अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में 152.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान

अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 13 मई 2023 तक CSMCL के प्रबंध संचालक रहे। जांच एजेंसी के अनुसार, उनके पास निगम के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों, निविदा तथा मैनपावर एजेंसियों के देयकों को मंजूरी देने के अधिकार थे।

EOW/ACB का आरोप है कि अनवर ढेबर के कहने पर त्रिपाठी ने निविदा की शर्तों में बदलाव कराया और कर्मचारियों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान कराकर कथित कमीशन प्राप्त करने की व्यवस्था लागू कराई।

जांच के मुताबिक, उनके कार्यकाल में पांचों एजेंसियों को कुल 1,52,39,77,666 रुपये, यानी लगभग 152.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें शामिल रकम का विवरण इस प्रकार है:

भुगतान का मदराशि
ओवरटाइमलगभग 82.66 करोड़ रुपये
बोनसलगभग 12.21 करोड़ रुपये
चार अतिरिक्त दिनों के काम का भुगतानलगभग 45.02 करोड़ रुपये
सेवा शुल्कलगभग 12.51 करोड़ रुपये
कुललगभग 152.40 करोड़ रुपये

जांच एजेंसी के अनुसार, सिद्धार्थ सिंघानिया मैनपावर एजेंसियों से कथित नकद कमीशन एकत्र कर त्रिपाठी तक पहुंचाता था। सिंघानिया के कथन के मुताबिक, सभी एजेंसियों से मिलाकर लगभग 70 से 80 लाख रुपये प्रतिमाह कमीशन आता था।

विवेचना में अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच सुमीत फैसिलिटीज की ओर से लगभग 15.65 करोड़ रुपये दिए जाने का विवरण भी सामने आया। EOW/ACB का दावा है कि त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल में एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये नकद कमीशन के रूप में प्राप्त कर अनवर ढेबर तक पहुंचाए।

जांच में त्रिपाठी के कार्यकाल के बाद भी नवीन प्रताप सिंह तोमर के माध्यम से कथित कमीशन वसूली जारी रहने तथा सेवा शुल्क और ओवरटाइम की रकम पर कमीशन की दर बढ़ाकर एक-तिहाई किए जाने का विवरण मिलने की बात कही गई है। एजेंसी के अनुसार, कथित अवैध रकम में से करीब 3 करोड़ रुपये प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जब्त किए हैं।

ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज को 48 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

जांच एजेंसी के अनुसार, बीआर लोहिया ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड के संस्थापक थे और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड भी इसी समूह की कंपनी थी। दोनों कंपनियों के प्रमुख निर्णय लोहिया द्वारा लिए जाने की बात जांच में सामने आई है।

EOW/ACB का आरोप है कि लोहिया ने कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट नीरज चौधरी को कर्मचारियों के ओवरटाइम और चार अतिरिक्त दिनों के काम के बिल तैयार करने के निर्देश दिए थे। इन बिलों के आधार पर CSMCL से भुगतान प्राप्त किया गया, लेकिन संबंधित कर्मचारियों को रकम नहीं दी गई। एजेंसी के मुताबिक, अधिकारियों को कथित नकद कमीशन देने में भी लोहिया की भूमिका थी।

जांच में दोनों कंपनियों को प्राप्त अतिरिक्त भुगतान का विवरण इस प्रकार है:

कंपनीकथित अतिरिक्त भुगतान
ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड33,45,05,110 रुपये
अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड14,63,48,143 रुपये
कुल48,08,53,253 रुपये

EOW/ACB के अनुसार, इस कुल राशि में से 38,31,76,541 रुपये अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में दिए गए थे। ईगल हंटर से संबंधित नकद कमीशन के वित्तीय विवरण में 13,57,92,000 रुपये दर्ज होने की बात भी जांच में सामने आई है। एजेंसी के मुताबिक, इस रकम में अलर्ट कमांडोज की ओर से दिया गया कमीशन भी शामिल था।

28.80 लाख रुपये की कथित कमीशन राशि ED की कार्रवाई में बरामद

जांच एजेंसी के मुताबिक, 29 नवंबर 2023 को ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज के अक्टूबर 2023 के लंबित बिल पारित कराने के बदले तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को लगभग 28.80 लाख रुपये दिए जाने थे।

EOW/ACB के अनुसार, बीआर लोहिया और अजय लोहिया के निर्देश पर दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक रायपुर भेजा गया। बैंक से रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपये कार्यालयीन खर्च के लिए रखे गए और शेष 28.80 लाख रुपये कथित कमीशन के लिए अलग किए गए।

एजेंसी का कहना है कि कंपनी के कर्मचारी जब यह रकम पहुंचाने जा रहे थे, तभी प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में राशि बरामद हुई। जांच में इस रकम का संबंध मैनपावर एजेंसियों से कथित कमीशन वसूली से जोड़ा गया है।

आंगड़िया नेटवर्क के जरिए नकदी भेजने के आरोप

विवेचना में आंगड़िया नेटवर्क के माध्यम से नकदी बाहर भेजे जाने से संबंधित कथन भी शामिल किए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, महमूद अहमद खान ने बताया कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच उसने पी. विजय कंपनी तक लगभग 60 से 70 करोड़ रुपये नकद पहुंचाए थे। उसके कथन के मुताबिक, उसे बताया गया था कि यह रकम अरुणपति त्रिपाठी की है।

पी. विजय कुमार एंड कंपनी के तत्कालीन पार्टनर निमेष चन्द्रकान्त पटेल ने अपने कथन में उक्त रकम मुंबई स्थित श्रीजी इंटरप्राइजेज को देने और आगे हैदराबाद भेजे जाने की बात कही। जांच एजेंसी के अनुसार, इन गवाहों के कथन भी चालान में शामिल किए गए हैं।

अरुणपति त्रिपाठी न्यायिक अभिरक्षा में, बीआर लोहिया के खिलाफ फरारी में चालान

EOW/ACB के पूरक चालान में शराब दुकानों के कर्मचारियों और अन्य गवाहों के कथन, CSMCL के भुगतान अभिलेख, एजेंसियों के देयक, कंपनी रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज और कथित नकद कमीशन से जुड़े वित्तीय विवरण शामिल किए गए हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, अरुणपति त्रिपाठी न्यायिक अभिरक्षा में हैं। वहीं, बीआर लोहिया को बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं होने पर उनके संबंध में फरारी पंचनामा तैयार कर फरारी में चालान पेश किया गया है।

दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(बी) और 8 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 467, 468, 471 और 120बी के तहत पूरक चालान प्रस्तुत किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की कार्यवाही के बाद होगा।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *