November 8, 2026

भोपाल/ग्वालियर। UPI पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के विरोध में मध्यप्रदेश के व्यापारियों ने बुधवार, 23 सितंबर को अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन किया। भोपाल में कुछ व्यापारियों ने QR स्कैनर पर काली पट्टी और कपड़ा लगाकर विरोध जताया, जबकि ग्वालियर के प्रमुख बाजारों में व्यापारियों ने ‘नो UPI डे’ मनाया। कई दुकानों पर UPI के बजाय नकद भुगतान लिया गया।

भोपाल में व्यापारियों ने UPI को दी ‘श्रद्धांजलि’

शब्बीर अहमद, भोपाल। UPI पर MDR के प्रस्ताव को लेकर व्यापारियों में नाराजगी देखने को मिली। कुछ व्यापारियों ने सांकेतिक रूप से UPI को ‘श्रद्धांजलि’ दी और QR स्कैनर पर काली पट्टी लगाकर विरोध दर्ज कराया।

सराफा कारोबारियों ने खास तौर पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि कई कारोबारों में 2 हजार रुपये से अधिक के बिल सामान्य हैं और अतिरिक्त शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। व्यापारियों ने केंद्र सरकार से 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित MDR ढांचे पर पुनर्विचार करने की मांग की।

हालांकि भोपाल में विरोध को एकसमान समर्थन नहीं मिला। कुछ दुकानदारों ने विरोध के बावजूद UPI भुगतान स्वीकार करना जारी रखा, उनका कहना था कि कई ग्राहक नकदी लेकर नहीं आते और डिजिटल भुगतान बंद करने से कारोबार प्रभावित हो सकता है।

ग्वालियर में मनाया गया ‘नो UPI डे’

कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। UPI पर प्रस्तावित MDR के विरोध में ग्वालियर के व्यापारियों ने भी ‘नो UPI डे’ मनाया। दाल बाजार, लोहिया बाजार, सराफा बाजार, फालका बाजार और सदर बाजार समेत कई प्रमुख बाजारों में व्यापारियों ने UPI भुगतान का विरोध किया।

कई दुकानों पर QR कोड को काले कपड़े से ढका गया। कुछ व्यापारियों ने UPI भुगतान स्वीकार करने के बजाय ग्राहकों से नकद भुगतान करने को कहा।

व्यापारी संगठनों का कहना है कि UPI आज कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। व्यापारियों ने मांग की है कि प्रस्तावित व्यवस्था पर सरकार पुनर्विचार करे।

क्या है UPI पर MDR का नया नियम?

केंद्र सरकार के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा P2M यानी ग्राहक से व्यापारी को होने वाले UPI भुगतान में 2,000 रुपये से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75 हजार रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है। वहीं 2,000 रुपये तक के भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था वाले ट्रांजैक्शन पर शुल्क नहीं होगा। सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत P2M UPI ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला शुल्क नहीं है और इसे सरकार या NPCI द्वारा टैक्स के रूप में नहीं वसूला जाता। यह मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में संबंधित भागीदारों के बीच वितरित होता है।

व्यापारियों का दावा- लागत बढ़ने का पड़ सकता है असर

ग्वालियर और भोपाल के व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क का असर कारोबार की लागत पर पड़ सकता है। उनका तर्क है कि कम मार्जिन वाले कारोबारों में यह अतिरिक्त खर्च चुनौती बढ़ा सकता है।

व्यापारी संगठनों ने सरकार से प्रस्तावित MDR व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है। कुछ संगठनों ने भविष्य में भी विरोध जारी रखने के संकेत दिए हैं।

पेट्रोल पंप संचालक भी कर चुके हैं विरोध का ऐलान

UPI MDR को लेकर पेट्रोल पंप संचालकों की ओर से भी विरोध सामने आया है। मध्यप्रदेश के पेट्रोल पंप डीलरों ने 16 अक्टूबर से 2 हजार रुपये से अधिक के UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने का ऐलान किया है।

अब देखना होगा कि व्यापारिक संगठनों के विरोध और सरकार द्वारा घोषित नई MDR व्यवस्था के बीच आगे क्या स्थिति बनती है।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *