पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले का अजयगढ़ क्षेत्र केन-बेतवा लिंक परियोजना और मझगाय-रुंझ बांधों से प्रभावित विस्थापित परिवारों के आंदोलन को लेकर चर्चा में है। जलमग्न हुए कुंवरपुर, बालूपुर, बनेहरी और विश्रामगंज समेत आसपास के गांवों के आदिवासी और किसान जल-सत्याग्रह कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने पानी के बीच लकड़ी के ढांचों पर लेटकर ‘न्याय दो या मार दो’ के नारे लगाए।
बांध के पानी के बीच जल-सत्याग्रह
आंदोलनकारियों का दावा है कि बांधों के कारण उनके घर और जमीनें जलमग्न हो गई हैं, लेकिन पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े मुद्दों का समाधान अब तक नहीं हुआ है। इसी को लेकर ग्रामीण पानी के बीच जल-सत्याग्रह कर रहे हैं।
जय किसान संगठन और आंदोलनकारियों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में ग्रामसभा की सहमति और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। उनका यह भी आरोप है कि उपजाऊ जमीनों को असिंचित बताकर मुआवजा तय किया गया और प्रशासन ने धारा 163 लागू कर आंदोलन की आवाज को दबाने का प्रयास किया।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
12.50 लाख के पुनर्वास पैकेज को लेकर विवाद
आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा पुनर्वास पैकेज को लेकर है। ग्रामीणों का दावा है कि सरकार की ओर से घोषित 12.50 लाख रुपये के पुनर्वास पैकेज का उन्हें पूरा लाभ नहीं मिला है। आंदोलनकारियों का कहना है कि कई परिवारों को पुराने 5 लाख रुपये के भुगतान का भी इंतजार है, जबकि उनके घरों तक बांध का पानी पहुंच चुका है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जलभराव की स्थिति ने उनके सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
प्रशासन ने दावों को खारिज करते हुए बताए आंकड़े
वहीं प्रशासन ने आंदोलनकारियों के दावों को खारिज करते हुए अलग आंकड़े पेश किए हैं। प्रशासन के अनुसार, रुंझ परियोजना के 670 और मझगाय परियोजना के 1,219, यानी कुल 1,889 विस्थापित परिवारों को 5 लाख रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है।
प्रशासन के मुताबिक, 12.50 लाख रुपये के पुनर्वास पैकेज को पूरा करने के लिए शेष 7.50 लाख रुपये के अंतर भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इन कैंपों में पात्र हितग्राहियों से शपथ पत्र और बैंक विवरण लेकर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
कागजी प्रक्रिया और जमीनी हालात के बीच अंतर
एक ओर प्रशासन भुगतान और विशेष कैंपों के जरिए पुनर्वास पैकेज पूरा करने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीण जलभराव के बीच आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज भुगतान और प्रभावित परिवारों की जमीनी स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अजयगढ़ क्षेत्र में चल रहा यह आंदोलन अब पुनर्वास, मुआवजे और विस्थापित परिवारों के अधिकारों से जुड़े सवालों का केंद्र बन गया है। आगे प्रशासन और प्रभावित ग्रामीणों के बीच बातचीत से इस विवाद का समाधान निकलता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।
