September 21, 2026

जगदलपुर। झीरम घाटी हत्याकांड मामले में विशेष NIA कोर्ट के फैसले के बाद अब आदिवासी समाज ने भी अपनी असहमति जाहिर की है। अदालत ने मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इसी बीच जगदलपुर के परपा में सर्व आदिवासी समाज की बैठक हुई, जिसमें बस्तर संभाग समेत करीब 6 से 7 जिलों के समाजजन और प्रभावित परिवारों के सदस्य शामिल हुए। बैठक में समाज के कुछ सदस्यों ने दावा किया कि सजा पाए लोग झीरम घाटी की घटना में शामिल नहीं थे और उन्हें गलत तरीके से मामले में आरोपी बनाया गया।

हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने की तैयारी

बैठक में समाज के लोगों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली बैठकों में ग्रामीणों का शामिल होना सामान्य बात है। उनका कहना है कि किसी बैठक में शामिल होना अपने आप में नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

इसी आधार पर समाज अब NIA कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। मौजूदा कानूनी स्थिति में मृत्युदंड पर अमल से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है और दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील का अधिकार है।

हर परिवार से 20 रुपए जुटाकर लड़ी जाएगी कानूनी लड़ाई

सर्व आदिवासी समाज ने कानूनी लड़ाई के लिए गांव-गांव और परिवारों से चंदा जुटाने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रत्येक परिवार से 20 रुपए लिए जाने की बात कही गई है।

समाज का कहना है कि पहले हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। वहां से राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई जारी रखने की तैयारी है।

‘जेल में बंद लोग निर्दोष’, बोले प्रकाश ठाकुर

सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि प्रभावित परिवारों के साथ बैठक में झीरम मामले के फैसले को लेकर चर्चा हुई। उनके मुताबिक, समाज फैसले से संतुष्ट नहीं है और प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके परिजन घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे।

ठाकुर ने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए लोग न तो झीरम की घटना में शामिल थे और न ही नक्सली गतिविधियों में संलिप्त थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित बैठकों में शामिल होना सामान्य प्रक्रिया थी, लेकिन इसे नक्सली गतिविधि से जोड़ना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि समाज अब इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगा और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी।

‘असली नक्सली आराम की जिंदगी जी रहे’, गंगा नाग का दावा

सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष गंगा नाग ने भी प्रभावित परिवारों से चर्चा का हवाला देते हुए कहा कि समाज को लगता है कि सजा पाए लोग निर्दोष हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के पीछे जिन लोगों को समाज ‘असली नक्सली’ मानता है, उनमें से कई आज भी बाहर हैं।

गंगा नाग ने कहा कि इसी वजह से समाज प्रभावित परिवारों के साथ मिलकर कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए एकजुट हुआ है।

झीरम घाटी मामले में NIA कोर्ट के फैसले के बाद सामने आई यह प्रतिक्रिया अब इस मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया और संभावित अपील पर केंद्रित है।

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