बिलासपुर। वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को निरस्त कर दिया है, जिसमें पति के पक्ष में तलाक की डिक्री मंजूर की गई थी। पति ने पत्नी के व्यवहार को मानसिक क्रूरता और परित्याग बताते हुए कई आरोप लगाए थे। इनमें करवा चौथ का व्रत बीच में तोड़ना, ससुराल छोड़कर मायके चले जाना और पति-पक्ष के खिलाफ आपराधिक व घरेलू हिंसा की शिकायत करना भी शामिल था।

जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पत्नी के खिलाफ क्रूरता और परित्याग के आरोप साबित नहीं होते। कोर्ट ने माना कि वैवाहिक जीवन में होने वाले सामान्य मतभेद, उतार-चढ़ाव और छोटे-मोटे विवाद अपने आप में क्रूरता की श्रेणी में नहीं आते।
2011 में हुई थी दोनों की शादी
मामला महासमुंद निवासी दंपती से जुड़ा है। दोनों की शादी 10 दिसंबर 2011 को गुरुद्वारा में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार हुई थी। पति का आरोप था कि शादी के कुछ महीनों बाद ही पत्नी का व्यवहार बदल गया और वह अक्सर विवाद करने लगी।
पति ने दावा किया कि पत्नी सास-ससुर का सम्मान नहीं करती थी और कई बार बिना पर्याप्त कारण बताए मायके चली जाती थी। उसने पत्नी के धार्मिक आचरण पर भी सवाल उठाए।
करवा चौथ का व्रत तोड़ने को बताया था मानसिक क्रूरता
पति की ओर से अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि पत्नी करवा चौथ का व्रत बीच में ही तोड़ देती थी। कथित तौर पर पत्नी कहती थी कि जब उसे पति के साथ रहना ही नहीं है, तो व्रत रखने का क्या फायदा।
इसके अलावा पति ने पत्नी पर आईपीसी की धारा 498-A के तहत झूठा मामला दर्ज कराने और घरेलू हिंसा की शिकायत करने का आरोप लगाया था। पति के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई उसके प्रति मानसिक क्रूरता थी।
पत्नी ने दहेज प्रताड़ना और मारपीट के लगाए आरोप
वहीं, पत्नी ने पति और ससुराल पक्ष के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह हमेशा अपना वैवाहिक जीवन बचाने और उसे निभाने के लिए तैयार रही।
पत्नी ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष की ओर से दहेज की मांग की जाती थी और मांग पूरी नहीं होने पर उसे शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
उसने बताया कि 2 जुलाई 2018 को रसोई में पैसे लाने को लेकर उसकी सास और देवरानी ने उसके साथ मारपीट की। पत्नी के अनुसार, पति ने उसके बाल पकड़कर उसे कमरे में बंद कर दिया, जिससे उसका एक दांत भी टूट गया। वह किसी तरह वहां से निकलकर गुरुद्वारा पहुंची और अपने परिजनों तथा पुलिस को घटना की जानकारी दी।
हाईकोर्ट ने कहा- हर वैवाहिक विवाद क्रूरता नहीं
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव, मतभेद और छोटे-मोटे झगड़े सामान्य परिस्थितियों का हिस्सा हो सकते हैं। इन्हें हर मामले में क्रूरता नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई पत्नी वैवाहिक परेशानी के दौरान पुलिस में शिकायत करती है, तो केवल शिकायत दर्ज कराने से उसे क्रूरता नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि संबंधित आचरण इतना गंभीर था कि पति-पत्नी का साथ रहना असंभव या अत्यंत कठिन हो गया था।
पति के आरोप सामान्य प्रकृति के, क्रूरता साबित नहीं
हाईकोर्ट ने मामले में पति की ओर से लगाए गए आरोपों को सामान्य प्रकृति का माना और कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा पर्याप्त आधार नहीं है, जिससे पत्नी के खिलाफ कानूनी रूप से क्रूरता या परित्याग साबित हो सके।
इसी आधार पर डिवीजन बेंच ने पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दी गई तलाक की डिक्री को निरस्त कर दिया।