पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में मझगाय बांध परियोजना के जलभराव क्षेत्र में ग्रामीणों का ‘चिता आंदोलन’ 15वें दिन भी जारी रहा। मूसलाधार बारिश और जलभराव के बीच ग्रामीणों ने मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर जल सत्याग्रह किया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था पूरी किए बिना जलभराव शुरू होने से कई गांव प्रभावित हुए हैं।

‘जय किसान संगठन’ के बैनर तले अमित भटनागर के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि मड़लिया, टपरियां और कुंवरपुर समेत कई इलाकों में पानी पहुंचने से घरों और गृहस्थी को नुकसान हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि प्रभावित परिवारों को उनका पूरा मुआवजा दिया जाए और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी की जाए।
15 दिनों से जल सत्याग्रह, आंदोलनकारियों के पैरों में पड़े घाव
ग्रामीणों के मुताबिक वे लगातार कई दिनों से पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि दूषित पानी में लंबे समय तक खड़े रहने के कारण कई लोगों के पैरों में घाव हो गए हैं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि जब तक प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में पूरा मुआवजा नहीं पहुंचता, तब तक वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। मझगाय बांध प्रभावितों का यह आंदोलन सितंबर की शुरुआत से लगातार अलग-अलग रूपों में जारी है।
मुआवजा और पुनर्वास को लेकर प्रशासन पर आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई परिवारों को अभी तक मुआवजा और पुनर्वास का पूरा लाभ नहीं मिला है। उनका कहना है कि जलभराव बढ़ने के बावजूद विस्थापन से पहले जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गईं।
हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में मझगाय परियोजना से प्रभावित भूमि और परिसंपत्तियों के मुआवजा भुगतान का बड़ा हिस्सा पहले ही वितरित किए जाने की जानकारी दी गई थी। इसलिए मौजूदा विवाद में किन परिवारों का भुगतान लंबित है और किन दावों पर आपत्ति है, यह अलग-अलग प्रकरणों के आधार पर स्पष्ट होना जरूरी है।
‘भूमि अर्जन अधिनियम 2013’ का हवाला
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास और मुआवजे से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही विस्थापन किया जाना चाहिए। वे भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रक्रिया तथा पात्र परिवारों को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई परिवारों के मुआवजे, संपत्ति के मूल्यांकन और पुनर्वास से जुड़े मामले अब भी लंबित हैं। इसी को लेकर ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह के जरिए प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है।
चिता आंदोलन से पहले भी हुए कई सत्याग्रह
मझगाय बांध, रुंझ बांध और केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों ने सितंबर में अलग-अलग चरणों में चिता, जल और मिट्टी सत्याग्रह किए हैं। इसके बाद आंदोलनकारियों ने सूली और अन्य प्रतीकात्मक सत्याग्रह भी किए।
ग्रामीणों की मुख्य मांग उचित मुआवजा, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के लंबित मामलों का निराकरण है। प्रशासन की ओर से भी प्रभावित परिवारों के मुआवजे और राहत से जुड़े कदम उठाए जाने की जानकारी सामने आई है। मौजूदा आंदोलन के बीच ग्रामीण अपने लंबित दावों के शीघ्र निराकरण की मांग पर कायम हैं।