November 6, 2026

बालोद। बोईरडीह जलाशय से आड़ेझर गांव में पेयजल आपूर्ति की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन शनिवार को चक्काजाम के साथ शुरू हो गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण महामाया माइंस जाने वाले मुख्य मार्ग पर बैठ गए, जिससे माइंस क्षेत्र में आयरन ओर के परिवहन पर असर पड़ा। महामाया, दुलकी और कलवर माइंस से खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित रही।

ग्रामीणों का कहना है कि आड़ेझर गांव लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रहा है। समस्या के स्थायी समाधान के लिए वे बोईरडीह जलाशय से पाइपलाइन के जरिए गांव तक पानी पहुंचाने की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने 23 सितंबर को बीएसपी प्रबंधन और एसडीएम डौंडी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग से अवगत कराया था। उनका आरोप है कि ज्ञापन के बाद भी कोई ठोस पहल नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें आंदोलन और चक्काजाम का रास्ता अपनाना पड़ा।

तहसीलदार और बीएसपी अधिकारी पहुंचे धरना स्थल

शनिवार दोपहर करीब 1 बजे तहसीलदार देवेंद्र नेताम और बीएसपी के अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनरत ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं।

ग्रामीणों के अनुसार, तहसीलदार ने पेयजल समस्या के समाधान के लिए पीएचई विभाग से चर्चा करने और समस्या के निराकरण का प्रयास करने की बात कही। वहीं ग्रामीणों के मुताबिक, बीएसपी अधिकारियों ने पेयजल उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई और कहा कि फिलहाल माइंस संचालन के लिए ही पानी की कमी है।

बीएसपी के जवाब से ग्रामीणों में बढ़ी नाराजगी

ग्रामीणों के अनुसार, बीएसपी अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में अन्य माइंस से भी उत्खनन शुरू होना है। ऐसे में तत्काल ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

इस जवाब के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र में वर्षों से बड़े पैमाने पर आयरन ओर का उत्खनन और परिवहन हो रहा है, उसी इलाके के लोगों को पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।

‘लोहा निकालने में रुचि, मूलभूत सुविधाओं में क्यों नहीं?’

पूर्व सरपंच भीखम भुआर्य ने कहा कि ग्रामीणों के क्षेत्र से बीएसपी प्रबंधन को कच्चा लोहा निकालना है, लेकिन खनन प्रभावित क्षेत्र के लोगों की मूलभूत जरूरतों के समाधान को लेकर प्रबंधन पीछे हट रहा है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से पेयजल के अलावा सड़क, रोजगार और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

जनपद सदस्य ने आंदोलन को दिया समर्थन

ग्रामीणों के अनिश्चितकालीन आंदोलन और चक्काजाम के बीच जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी भी शनिवार को धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी मांगों और समस्याओं की जानकारी ली और आंदोलन को समर्थन दिया।

जनपद सदस्य ने ग्रामीणों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए। उन्होंने शासन, जिला प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन से ग्रामीणों के साथ गंभीरता से चर्चा कर समस्या का समाधान निकालने की मांग की।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपनी मूलभूत जरूरत के लिए आंदोलन कर रहे हैं। संबंधित विभागों और बीएसपी प्रबंधन को सकारात्मक पहल कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को बार-बार आंदोलन और चक्काजाम के लिए मजबूर न होना पड़े।

बीएसपी और शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी

धरना स्थल पर ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर बीएसपी प्रबंधन सहित शासन और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि जब क्षेत्र में खनन और खनिज परिवहन लगातार जारी है, तो खनन प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों के लिए पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी पेयजल समस्या को लंबे समय से गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी वजह से अब उन्हें सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ा है।

बोईरडीह जलाशय से पाइपलाइन बिछाने की प्रमुख मांग

ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि बोईरडीह जलाशय से पाइपलाइन के जरिए आड़ेझर गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जलाशय से पानी उपलब्ध होने पर गांव की लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।

फिलहाल ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी है और चक्काजाम के कारण माइंस क्षेत्र में खनिज परिवहन प्रभावित हुआ है।

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