रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में करीब 500 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलाने का झांसा देकर 15 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ के.के. श्रीवास्तव के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने 23 सितंबर 2026 को रायपुर की विशेष PMLA अदालत के समक्ष मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की है।

इससे एक दिन पहले, 22 सितंबर को ED ने के.के. श्रीवास्तव से जुड़ी करीब 3.25 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया था।
FIR और पुलिस चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई जांच
ED के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच रायपुर के तेलीबांधा थाने में दर्ज FIR और उसके बाद छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई। पुलिस मामले में के.के. श्रीवास्तव और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप दर्ज किए गए थे।
ED ने 30 जुलाई 2026 को के.के. श्रीवास्तव को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। उन्हें विशेष PMLA अदालत, रायपुर के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें ED की हिरासत में भेजा गया था।
500 करोड़ के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का दिया झांसा
ED के अनुसार, मामला जून 2023 का है। एजेंसी का आरोप है कि के.के. श्रीवास्तव ने मेसर्स रावत एसोसिएट्स के प्रोपराइटर को भरोसा दिलाया कि रायपुर में करीब 500 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलाया जा सकता है।
इसके लिए करीब 15 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा कराने की बात कही गई। ED के मुताबिक, इस दावे पर भरोसा करते हुए रावत एसोसिएट्स के प्रोपराइटर ने 15 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए।
पांच बैंक खातों में ट्रांसफर हुई रकम
जांच एजेंसी के मुताबिक, 15 करोड़ रुपये एक ही बैंक खाते में नहीं भेजे गए, बल्कि पांच अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए। इन खातों की जानकारी कथित तौर पर आरोपी की ओर से व्हाट्सऐप के जरिए उपलब्ध कराई गई थी।
ED का दावा है कि जांच में सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर ये बैंक खाते थे, उन्हें कथित तौर पर इन खातों के इस्तेमाल की जानकारी नहीं थी। एजेंसी के मुताबिक, संबंधित कंपनियां या संस्थाएं भी अपने पंजीकृत पतों पर मौजूद नहीं मिलीं।
शेल और कंड्यूट कंपनियों के जरिए रकम की लेयरिंग का आरोप
ED के अनुसार, कथित तौर पर ठगी से हासिल 15 करोड़ रुपये को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय शेल और कंड्यूट संस्थाओं के नेटवर्क के जरिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया।
एजेंसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए रकम के वास्तविक स्रोत और स्वरूप को छिपाने की कोशिश की गई। जांच के दौरान रकम का एक हिस्सा विदेश भेजे जाने की बात भी सामने आई।
ED के मुताबिक, विदेशों में किए गए लेन-देन को कथित तौर पर वास्तविक कारोबारी गतिविधियों के रूप में दिखाने की कोशिश की गई। इसके लिए फ्रेट चार्ज और कंटेनर लीजिंग जैसे कारोबारी विवरण का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के अनुसार, रकम दुबई (UAE), हांगकांग, चीन और सिंगापुर में स्थित लाभार्थियों तक भेजी गई।
3.40 करोड़ रुपये पीड़ित को लौटाने का दावा
ED के मुताबिक, कथित तौर पर ठगी गई 15 करोड़ रुपये की रकम में से करीब 3.40 करोड़ रुपये पीड़ित को वापस किए गए। हालांकि, एजेंसी का आरोप है कि यह रकम पहले से लेयर की गई धनराशि में से लौटाई गई और इसे वास्तविक कारोबारी भुगतान अथवा वैध पुनर्भुगतान के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई।
ED के अनुसार, करीब 11.60 करोड़ रुपये अब भी वापस नहीं किए गए हैं।
3.25 करोड़ की संपत्तियां कुर्क
मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान ED ने 22 सितंबर 2026 को के.के. श्रीवास्तव से जुड़ी 3.25 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया। इसके अगले दिन, 23 सितंबर को एजेंसी ने विशेष PMLA अदालत, रायपुर के समक्ष अभियोजन शिकायत दाखिल की।
ED ने अपनी कार्रवाई में के.के. श्रीवास्तव के खिलाफ PMLA, 2002 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला आगे बढ़ाया है। एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।