ग्वालियर। मध्य प्रदेश के इंदौर, जबलपुर और भोपाल ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देश के शीर्ष चार शहरों में जगह बनाई है, जबकि ग्वालियर की रैंकिंग इन शहरों से काफी पीछे रही। इंदौर दूसरे, जबलपुर तीसरे और भोपाल चौथे स्थान पर रहे, जबकि ग्वालियर 30वें पायदान पर है।
चारों शहरों के स्कोर की बात करें तो इंदौर को 197, जबलपुर को 195 और भोपाल को 192 अंक मिले हैं। वहीं ग्वालियर का स्कोर 157 अंक रहा। हालांकि, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में सिर्फ हवा में प्रदूषण की मात्रा ही नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों और उनके प्रभाव का भी आकलन किया जाता है।

धूल और निर्माण कार्यों से बढ़ी चुनौती
ग्वालियर में सड़कों पर उड़ती धूल, बड़े निर्माण कार्यों और बढ़ते ट्रैफिक के बीच वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है। निर्माण स्थलों से निकलने वाले धूल कण और सड़क की धूल हवा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं।
लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से सांस संबंधी समस्याओं समेत स्वास्थ्य पर अन्य प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में शहर की वायु गुणवत्ता को लेकर लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
करोड़ों के बजट के बावजूद उठ रहे सवाल
प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपलब्ध कराए गए फंड और योजनाओं के बावजूद शहर में अपेक्षित सुधार नहीं दिखने को लेकर स्थानीय लोगों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए मिलने वाले फंड का प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं पर खर्च और उनके परिणामों का वास्तविक आकलन संबंधित विभागों के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा।
कलेक्टर ने बताई ग्वालियर की भौगोलिक स्थिति और निर्माण कार्यों को वजह
ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने शहर की भौगोलिक स्थिति और वर्तमान में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों को भी वायु गुणवत्ता प्रभावित होने की वजह बताया है।
कलेक्टर के मुताबिक, ग्वालियर की मिट्टी अपेक्षाकृत ज्यादा ड्राई नेचर की है, जिसके कारण छोटे-छोटे धूल कण हवा में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। इसके अलावा ग्वालियर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास, एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट और अन्य बड़े निर्माण कार्य भी वर्तमान में हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नगर निगम के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
अगली रैंकिंग में सुधार की चुनौती
प्रशासन का लक्ष्य धूल और प्रदूषण पर नियंत्रण कर ग्वालियर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसके लिए निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल और सड़क की धूल को नियंत्रित करना अहम चुनौती है।
अब देखना होगा कि प्रदूषण नियंत्रण की योजनाओं और प्रशासनिक प्रयासों का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है और आगामी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में ग्वालियर की स्थिति में कितना सुधार होता है।