November 6, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज की अध्यक्षता में आयोजित प्रेस वार्ता में मदरसा शिक्षा, नई शिक्षा नीति, अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों, मुस्लिम समाज के विकास और केंद्र-राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद शादाब शम्स भी मौजूद रहे।

प्रेस वार्ता में डॉ. सलीम राज ने शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को मुस्लिम समाज की नई पीढ़ी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सभी पात्र नागरिकों तक पहुंचना चाहिए और मुस्लिम समाज को भी शिक्षा, कौशल, स्वरोजगार और उद्यमिता से जुड़े अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।

मदरसे में आधुनिक शिक्षा और कौशल पर जोर

डॉ. सलीम राज ने कहा कि मुस्लिम समाज के बच्चों और युवाओं का भविष्य शिक्षा और कौशल से जुड़ा हुआ है। वर्तमान समय में ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें दीनी एवं सांस्कृतिक शिक्षा के साथ कंप्यूटर, विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, तकनीकी ज्ञान और रोजगारपरक कौशल भी शामिल हों।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का उल्लेख किया, जिसमें मदरसे के बच्चे के “एक हाथ में कुरआन और दूसरे हाथ में कंप्यूटर” की बात कही गई है। सलीम राज के अनुसार, इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखते हुए आधुनिक ज्ञान और तकनीक के अवसर उपलब्ध कराना है।

सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं में शिक्षा, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और युवाओं के रोजगार से जुड़े कई अवसर उपलब्ध हैं।

उन्होंने मुस्लिम समाज में इन योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। साथ ही कहा कि युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कौशल, उद्यमिता, तकनीक और स्वरोजगार के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत बनने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।

मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा को बताया जरूरी

डॉ. सलीम राज ने मुस्लिम महिलाओं और युवतियों की शिक्षा एवं आर्थिक भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब उसकी बेटियों और महिलाओं को शिक्षा और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।

उन्होंने शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए मुस्लिम समाज की नई पीढ़ी को आधुनिक अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया।

उत्तराखंड के मदरसा मॉडल का दिया उदाहरण

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद शादाब शम्स ने उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा को लेकर किए गए बदलावों और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के लिए विकसित व्यवस्था का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में उत्तराखंड में की गई पहल के अनुभवों पर दूसरे राज्यों में भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक ज्ञान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की जरूरत बताई।

छत्तीसगढ़ में मदरसा शिक्षा को आधुनिक बनाने पर चर्चा

प्रेस वार्ता के दौरान छत्तीसगढ़ में मदरसा शिक्षा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने, अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक अवसर विकसित करने और युवाओं को कौशल व रोजगार से जोड़ने की संभावित कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई।

डॉ. सलीम राज ने कहा कि लक्ष्य ऐसा होना चाहिए कि मुस्लिम समाज के बच्चे अपनी दीनी और सांस्कृतिक पहचान के साथ आधुनिक भारत की प्रतिस्पर्धा में भी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सकें। वे डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, अधिकारी या उद्यमी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकें और देश के विकास में योगदान दें।

‘सबका साथ, सबका विकास’ के तहत योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर

डॉ. सलीम राज ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के संकल्प के अनुरूप पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसरों को मुस्लिम समाज की नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा और कौशल के माध्यम से मुस्लिम समाज के युवा अपने भविष्य को मजबूत कर सकते हैं और देश के विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *