इस समाचार का सार यह है कि Dongargarh की 55 करोड़ रुपये की परिक्रमा पथ परियोजना अब एक बड़े राजनीतिक और जन-विवाद का विषय बन गई है।

मुख्य बिंदु
- किसानों का विरोध: प्रभावित किसानों का आरोप है कि पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद उनकी निजी कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और उनकी आपत्तियों का उचित समाधान नहीं हुआ।
- शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंचीं: किसानों ने पहले कलेक्टर कार्यालय में आपत्तियां दर्ज कराईं और बाद में मामला संभाग आयुक्त तक पहुंचा।
- कांग्रेस का विरोध: कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर परियोजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि शहर की प्राथमिक जरूरत बाईपास सड़क है, न कि परिक्रमा पथ।
- बाईपास बनाम परिक्रमा पथ: विपक्ष का तर्क है कि भारी वाहनों के कारण शहर में यातायात और दुर्घटना की समस्या है, इसलिए पहले बाईपास का निर्माण होना चाहिए।
- परियोजना की उपयोगिता पर सवाल: विरोधियों का कहना है कि जिन धार्मिक स्थ
- लों को जोड़ने के लिए परिक्रमा पथ बनाया जा रहा है, वे पहले से सड़क मार्ग से जुड़े हुए हैं।
- प्रशासन का पक्ष: जिला प्रशासन का दावा है कि यह परियोजना धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि करेगी।
- पारदर्शिता की मांग: विरोध करने वाले पक्ष ने डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट), अंतिम रूट मैप, भूमि चयन के आधार और वैकल्पिक विकल्पों के अध्ययन को सार्वजनिक करने की मांग की है।
- आंदोलन की चेतावनी: कांग्रेस ने कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 30 जून को चक्काजाम सहित उग्र आंदोलन किया जाएगा।
सबसे बड़ा विवाद
पूरे विवाद का केंद्र यह प्रश्न है कि जब Dongargarh लंबे समय से बाईपास सड़क की मांग कर रहा है, तो प्रशासन ने परिक्रमा पथ परियोजना को प्राथमिकता क्यों दी। जब तक इसका स्पष्ट तकनीकी, आर्थिक और प्रशासनिक आधार सामने नहीं आता, तब तक यह परियोजना विवादों में बनी रह सकती है।
यह मामला अब केवल एक निर्माण परियोजना का नहीं, बल्कि भूमि अधिग्रहण, विकास की प्राथमिकताओं, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के उपयोग पर व्यापक बहस का विषय बन चुका है।