शहडोल। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल शहडोल जिले के केशवाही सरकारी कॉलेज में शिक्षा व्यवस्था और छात्रवृत्ति के लिए दर्ज की जा रही ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कॉलेज की कई कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम दिखाई दी, जबकि उपस्थिति रजिस्टरों में भी रिकॉर्ड अधूरे मिले। इसी बीच कॉलेज के एक असिस्टेंट प्रोफेसर के बयान ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कक्षाओं में गिने-चुने छात्र, कई कमरे खाली
केशवाही सरकारी कॉलेज में पड़ताल के दौरान कई कक्षाओं में विद्यार्थी बेहद कम संख्या में नजर आए। कहीं एक-दो छात्र मौजूद थे तो कहीं तीन-चार विद्यार्थी ही दिखाई दिए। कुछ कक्षाएं पूरी तरह खाली मिलीं।
इसके बाद उपस्थिति व्यवस्था की पड़ताल की गई तो फिजिकल रजिस्टरों में भी कई जगह रिकॉर्ड अधूरे मिले। कहीं उपस्थिति रजिस्टर उपलब्ध नहीं था, तो कहीं केवल विद्यार्थियों के नाम दर्ज थे। कुछ रजिस्टरों में जुलाई के शुरुआती दिनों की उपस्थिति दर्ज होने के बाद आगे के कॉलम खाली नजर आए।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कक्षाओं में विद्यार्थियों की नियमित मौजूदगी नहीं दिखाई दे रही थी और फिजिकल रिकॉर्ड भी अधूरा था, तो छात्रवृत्ति के ऑनलाइन पोर्टल पर उनकी नियमित उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की जा रही थी।
असिस्टेंट प्रोफेसर के बयान से उठे सवाल
मौके पर मौजूद शिक्षकों से जब ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर सवाल किया गया तो असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष तिवारी ने कैमरे पर कहा कि विद्यार्थी कॉलेज नहीं आते, लेकिन छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज करना जरूरी होता है। उनके मुताबिक इसी वजह से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाती है।
डॉ. तिवारी ने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति केवल केशवाही कॉलेज तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेशभर में देखने को मिलती है।
उनके इस बयान के बाद ऑनलाइन उपस्थिति की प्रक्रिया पर सवाल और गहरा गया है। हालांकि, यह स्पष्ट होना बाकी है कि कॉलेज के ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज प्रत्येक उपस्थिति वास्तविक थी या नहीं।
ऑनलाइन पोर्टल और रजिस्टर का मिलान जरूरी
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कॉलेज के फिजिकल उपस्थिति रजिस्टर और ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड में कितनी समानता है। क्या ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने से पहले विद्यार्थियों की वास्तविक मौजूदगी का सत्यापन किया गया था? यदि किया गया था तो उसका रिकॉर्ड क्या है?
इन सवालों का जवाब उच्च शिक्षा विभाग द्वारा की जाने वाली जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। उपस्थिति और छात्रवृत्ति रिकॉर्ड का मिलान होने पर ही यह पता चलेगा कि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है या ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत किसी अन्य व्यवस्था के आधार पर उपस्थिति दर्ज की गई।
कॉलेज भवन और व्यवस्थाओं पर भी सवाल
केशवाही सरकारी कॉलेज में शिक्षा व्यवस्था के अलावा बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी समस्याएं सामने आई हैं। कॉलेज भवन में पानी रिसने के निशान और दीवारों में दरारें दिखाई दीं। बाउंड्री वॉल नहीं होने से जमीन पर कब्जे की शिकायतें भी बताई गई हैं।
वहीं, खेल सामग्री की गुणवत्ता को लेकर छात्रों ने सवाल उठाए हैं। कॉलेज में स्थायी प्राचार्य भी नहीं है और बुढ़ार के प्राचार्य को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर
पूरे मामले में अब उपस्थिति रजिस्टर, ऑनलाइन पोर्टल और छात्रवृत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि इन तीनों रिकॉर्ड का मिलान कराया जाता है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि ऑनलाइन दर्ज उपस्थिति वास्तविक उपस्थिति पर आधारित थी या छात्रवृत्ति प्रक्रिया के लिए अलग तरीके से दर्ज की गई थी।
फिलहाल सामने आए बयानों और रिकॉर्ड की स्थिति के आधार पर कॉलेज की व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े हुए हैं, लेकिन किसी फर्जीवाड़े की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।