November 6, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले तीन दिनों से जारी भारी बारिश के कारण कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। बस्तर संभाग समेत कई इलाकों में नदी-नाले उफान पर हैं, सड़कें जलमग्न हो गई हैं और निचले क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को अलर्ट रहने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भी भारी बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने लोगों से नदी-नालों, जलप्रपातों और उफनते जलस्रोतों से दूर रहने तथा जलमग्न पुल-पुलियों और सड़कों को पार नहीं करने की सलाह दी है।

बिना जरूरत यात्रा से बचें, डायल 112 पर करें संपर्क

सीएम साय ने कहा कि भारी बारिश के दौरान बिना आवश्यकता यात्रा करने से बचें, खासकर रात के समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। गिरे हुए बिजली के तारों से दूरी बनाए रखें और किसी भी विद्युत खतरे की सूचना तत्काल संबंधित विभाग, पुलिस या स्थानीय प्रशासन को दें।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। पहाड़ी और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में भी सतर्कता बरतने को कहा गया है। किसी भी आपात स्थिति में डायल 112 अथवा स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की अपील की गई है।

गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोले गए

धमतरी जिले में लगातार बारिश के चलते गंगरेल बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ा। 25 सितंबर की सुबह बांध 98.14 प्रतिशत भर चुका था और उस समय 10 गेटों से 54,950 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। बाद में जलस्तर बढ़ने के कारण बांध के सभी 14 गेट खोल दिए गए और जल निकासी बढ़ाई गई।

गंगरेल के अलावा मुरुमसिल्ली, दुधावा और सोंढूर जलाशयों में भी जलस्तर काफी बढ़ गया है। बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण महानदी और आसपास की नदियों के तटीय इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।

जगदलपुर में बाढ़ जैसे हालात

बस्तर संभाग में लगातार बारिश के कारण कई नदी-नाले उफान पर हैं। जगदलपुर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कई मार्गों पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। डिमरापाल के पास नेशनल हाईवे पर पानी भरने की भी जानकारी सामने आई है, जहां आपदा राहत के लिए SDRF की टीम तैनात की गई है।

इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे के इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। प्रशासन और राहत दल संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रख रहे हैं।

कांकेर में दूध नदी उफान पर, कई रास्ते बंद

कांकेर जिले में लगातार बारिश के कारण दूध नदी समेत कई नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। आमाबेड़ा-धनोरा और कांकेर-आमाबेड़ा मार्ग पर पानी आने से आवागमन प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।

कोंडागांव में पुल-पुलियों के ऊपर बह रहा पानी

कोंडागांव में लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। कई ग्रामीण मार्गों पर पानी भर गया है और पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने के कारण गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। प्रशासन की टीमें जलभराव और बढ़े जलस्तर वाले क्षेत्रों का जायजा ले रही हैं।

सुकमा में निचली बस्तियों को कराया जा रहा खाली

सुकमा जिले में भी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने हैं। कोंटा क्षेत्र की निचली बस्तियों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की जा रही है। कई ग्रामीण इलाकों में पानी बढ़ने से प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर तैनात हैं।

दोरनापाल-कोंटा और दोरनापाल-सुकमा मार्ग पर भी कई जगह पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखने की अपील की है।

कई जिलों में स्कूल बंद

भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। बालोद में 25 सितंबर को सभी शासकीय, गैर-सरकारी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में छुट्टी रखी गई। वहीं बस्तर संभाग के कई जिलों में भी स्कूल बंद रखने के आदेश जारी हुए हैं।

प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 25 सितंबर तक प्रदेश में मानसूनी बारिश सामान्य औसत के आसपास से ऊपर पहुंच चुकी थी। बीते 24 घंटों में भी राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई।

मौसम विभाग ने भी छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से मध्य भारत में बारिश का दौर तेज हुआ है।

लोगों से प्रशासन की अपील

प्रशासन ने लोगों से नदी, नाले, पुल-पुलिया और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक जाने से बचने को कहा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरियर या प्रतिबंधों का पालन करने और मौसम संबंधी जानकारी के लिए अधिकृत सरकारी स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की गई है।

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