ग्राम पंचायत डोमनपुर में मुक्तिधाम तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर विवाद सामने आया। निजी जमीन पर बाउंड्रीवाल किए जाने के कारण ग्रामीणों को शव को मुक्तिधाम तक ले जाने में परेशानी हुई। रास्ता बंद होने की सूचना के बाद ग्रामीणों ने तहसीलदार और थाना प्रभारी से मदद की गुहार लगाई। सूचना पर प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत के बाद तत्काल रास्ता खुलवाया गया। इसके बाद शव को मुक्तिधाम पहुंचाकर अंतिम संस्कार कराया गया।

100 साल पुराने रास्ते के इस्तेमाल का ग्रामीणों का दावा
ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि विजय जायसवाल के मुताबिक, मुक्तिधाम तक जाने वाले रास्ते का ग्रामीण करीब 100 वर्षों से निस्तारी और अंतिम संस्कार के लिए उपयोग करते आ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस रास्ते पर समय-समय पर कब्जा कर बाउंड्रीवाल कर दी जाती है। इससे गांव में किसी की मृत्यु होने पर शव को मुक्तिधाम तक ले जाने में परेशानी होती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस रास्ते को स्थायी रूप से निस्तारी के लिए खुला रखने की मांग की है।
परंपरागत मेड़ के रास्ते पर बाउंड्रीवाल से बनी स्थिति
मामले को लेकर तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला ने बताया कि मुक्तिधाम से लगी जमीन निजी है। उनके अनुसार, ग्रामीण लंबे समय से निजी भूमि से लगी परंपरागत मेड़ के रास्ते का इस्तेमाल शव को मुक्तिधाम तक ले जाने के लिए करते रहे हैं।
भूमि स्वामी की ओर से रास्ते पर बाउंड्रीवाल किए जाने के बाद शव को मुक्तिधाम तक ले जाने में समस्या उत्पन्न हुई। सूचना मिलने पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से चर्चा की और तत्काल रास्ता उपलब्ध कराया, जिसके बाद अंतिम संस्कार कराया जा सका।
जमीन मालिक ने प्रशासन की कार्रवाई पर उठाए सवाल
वहीं निजी जमीन के मालिक हितेश चंद्राकर ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि संबंधित जमीन उनकी निजी संपत्ति है और पूर्व में उनके खिलाफ बेजा कब्जा संबंधी मामला चला था, जिसमें वे जीत चुके हैं।
हितेश चंद्राकर का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना के ग्रामीणों और प्रशासनिक अमले ने उनकी जमीन की बाउंड्रीवाल तोड़कर रास्ता बना दिया। उन्होंने मामले में नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
अंतिम संस्कार तो हुआ, लेकिन विवाद का स्थायी समाधान बाकी
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद तत्काल रास्ता खुला और शव को मुक्तिधाम पहुंचाकर अंतिम संस्कार कराया गया। हालांकि, निजी जमीन से होकर मुक्तिधाम तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
एक तरफ ग्रामीण इस रास्ते को लंबे समय से इस्तेमाल किए जाने का हवाला देते हुए स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, वहीं जमीन मालिक इसे अपनी निजी संपत्ति से जुड़ा मामला बता रहे हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन दोनों पक्षों के दावों और भूमि संबंधी रिकॉर्ड की जांच के बाद इस रास्ते को लेकर क्या स्थायी व्यवस्था तय करता है, ताकि भविष्य में अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाने में ग्रामीणों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।