रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान की कोशिश अब महत्वपूर्ण दौर में पहुंच गई है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में दोनों राज्यों ने महानदी जल बंटवारे से जुड़े अपने-अपने पक्ष रखे और आपसी सहमति से समाधान का रास्ता तलाशने पर चर्चा हुई।

बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और जल शक्ति मंत्रालय व केंद्रीय जल आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। चर्चा का मुख्य उद्देश्य महानदी के जल के नियमन और बंटवारे को लेकर ऐसा ढांचा तैयार करना था, जिसे दोनों राज्य स्वीकार कर सकें।
अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक
महानदी जल विवाद को लेकर 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में बैठक हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने-अपने राज्यों की स्थिति और चिंताओं को बैठक में रखा।
बैठक में विवाद का समाधान बातचीत, तकनीकी आकलन और आपसी सहमति के आधार पर निकालने पर जोर दिया गया। दोनों राज्यों के बीच आगे भी तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा जारी रहने की बात सामने आई है।
दोनों राज्यों के बीच बातचीत का सिलसिला तेज
महानदी विवाद के समाधान को लेकर पिछले कुछ महीनों में दोनों राज्यों के बीच बातचीत तेज हुई है। जुलाई 2026 में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में दोनों मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई थी। इसके बाद दोनों राज्यों ने केंद्रीय जल आयोग के साथ तकनीकी स्तर पर चर्चा आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
1 अक्टूबर की बैठक इसी प्रक्रिया की अगली महत्वपूर्ण कड़ी रही। केंद्र सरकार की ओर से दोनों राज्यों के बीच संवाद और तकनीकी सहयोग के जरिए समाधान की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
20 सितंबर को भुवनेश्वर में मिले थे CM साय और CM माझी
इससे पहले 20 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भुवनेश्वर में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से उनके आवास पर मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आपसी सहयोग, विकास, जनकल्याण और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
महानदी जल विवाद को लेकर सीएम साय ने उस दौरान उम्मीद जताई थी कि यह लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा जल्द सुलझ सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों राज्य केंद्रीय जल आयोग के निर्णय को स्वीकार करने के लिए सहमत हैं।
क्या है महानदी जल विवाद?
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। ओडिशा का कहना है कि महानदी के ऊपरी हिस्से में छत्तीसगढ़ में बनाए जा रहे जल प्रोजेक्ट्स का असर गैर-मानसूनी अवधि में ओडिशा तक पहुंचने वाले पानी पर पड़ता है।
वहीं छत्तीसगढ़ का पक्ष रहा है कि उसे सिंचाई, औद्योगिक और घरेलू जरूरतों के लिए अपने हिस्से के पानी का उपयोग करने का अधिकार है। विवाद के समाधान के लिए महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन मार्च 2018 में किया गया था।
समाधान की दिशा में आगे क्या?
1 अक्टूबर की बैठक के बाद अब दोनों राज्यों के बीच डेटा साझा करने, तकनीकी आकलन और आगे की बातचीत की प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच अगले चरण में भी विचार-विमर्श जारी रहेगा और लक्ष्य दोनों राज्यों के लिए स्वीकार्य एवं टिकाऊ समाधान तलाशना है।